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Crisis: बेहतर नहीं है इनके हालात, मुश्किल से चुका रहे वेतन-भत्ते

सरकारी नियंत्रण में लेने और विश्वविद्यालयों का संघठक कॉलेज बनाने के प्रस्ताव भी हवा हो चुके हैं।

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salary and allowance

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रक्तिम तिवारी/अजमेर.

हर साल हजारों टेक्नोक्रेट्स तैयार करने वाले प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेज की माली स्थिति खराब है। ज्यादातर कॉलेज की आर्थिक स्थिति खराबहै। स्टाफ के वेतन-भत्ते ‘ चुकाने ’ में पसीने छूट रहे हैं। इन्हें सरकारी नियंत्रण में लेने और विश्वविद्यालयों का संघठक कॉलेज बनाने के प्रस्ताव भी हवा हो चुके हैं।

तकनीकी शिक्षा विभाग के अधीन अजमेर के दो कालेज सहित बीकानेर , झालावाड़, भरतपुर, बांसवाड़ा, भीलवाड़ा, धौलपुर, बाडमेर, करौली, बारां में इंजीनियरिंग कॉलेज संचालित हैं। यह कॉलेज स्वायत्ताशासी समितियों के अधीन संचालित हैं। सभी कॉलेज में 40 प्रतिशत स्टाफ की भर्ती नॉन प्लान योजना (सरकार से मंजूर पद) पर हुई है। 60 प्रतिशत शिक्षक, अधिकारी और कर्मचारी प्लान योजना (सेल्फ फाइनेंस स्कीम) में कार्यरत हैं।

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फेल हो चुकी ये योजनाएं

भाजपा राज में अजमेर, दौसा, बारां इंजीनियरिंग कॉलेज को सरकारी नियंत्रण में लेने का प्रस्ताव बना था। शैक्षिक और अशैक्षिक कार्मिकों का वेतनभार, एक्रिडिटेशन के लिए 80 प्रतिशत पदों की स्थिति और अन्य सूचनाएं मांगी गई। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय ने भी बड़ल्या और माखुपुरा स्थित इंजीनियरिंग कॉलेज को संघठक कॉलेज बनाने का प्रस्ताव भेजा था। दोनों का नतीजा सिफर है।

विद्यार्थियों की फीस से आय
सरकारी फीस के अलावा सभी इंजीनियरिंग कॉलेज में ब्रांचवार सेल्फ फाइनेंसिंग सीट हैं। विद्यार्थियों की फीस ही आय का जरिया हैं खासतौर पर एसएफएस सीट कमाऊ पूत हैं। अजमेर का महिला इंजीनियरिंग कॉलेज में सभी ब्रांच सेल्फ फाइनेंसिंग स्कीम में संचालित हैं। यहां छात्राओं लाखों रुपए फीस देनी पड़ती है। सभी कॉलेज में स्टाफ के वेतन-भत्ते चुकाने के लिए प्रतिमाह एफडीआर तुड़वानी पड़ती है।

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फैक्ट फाइल
राज्य के इंजीनियरिंग कोर्स में सीट-55 हजार से ज्यादा
कॉलेज की आय-एसएफएस सरकारी सीट की एवज में मिलने वाली फीस
सरकार से अनुदान-नहीं मिलता नियमित (50 लाख से 1 करोड़ तक ही)
बी.टेक कोर्स फीस (चार साल)-2 लाख रुपए
एम.टेक कोर्स फीस (दो साल)-71 हजार रुपए
एमसीए कोर्स की फीस (दो साल)-62 हजार रुपए
एमबीए (दो साल)-77 हजार रुपए

ज्यादातर कॉलेज शुरुआत से ऑटोनॉमस सोसायटी के अधीन हैं। इनकी आर्थिक स्थिति से सरकार वाकिफ है। कॉलेज को कैसे राहत मिले इसके लिए प्रयास जारी हैं।
डॉ. सुभाष गर्ग, तकनीकी और चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री