अजमेर.
परम्परागत डकैती-चोरियों ने अब साइबर और ऑनलान क्राइम की शक्ल अख्तियार कर ली है। इसके अनुसार पुलिसकर्मियों की तकनीकी दक्षता और प्रशिक्षण पर सर्वाधिक जोर है। काफी हद तक यह पुुलिस का पुर्नगठन भी कहा जा सकता है। यह बात पुलिस महानिदेशक डॉ. भूपेंद्र यादव (DGP dr. bhupendra yadav) ने शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में कही।
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राजस्थान लोक सेवा आयोग (rpsc ajmer) में डीपीसी (DPC) के लिए आए डॉ. यादव ने कहा कि पिछले 25-30 साल में प्रदेश में अपराध (crime) और अपराधियों (criminals) की प्रवृत्ति में बदलाव हुआ है। डकैती, चोरियों के साथ अब ऑनलाइन ठगी (online fraud), हैकिंग, सोशल साइट्स (social sights) पर ब्लैकमेलिंग जैसी घटनाए बढ़ रही हैं। पुलिस भी इन चुनौतियों से वाकिफ है।
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पुलिस अधिकारियों-कार्मिकों को साइबर क्राइम (cyber crime) से निबटने का प्रशिक्षण, हाइटेक तकनीकी उपकरणों की व्यवस्था पर सर्वाधिक जोर है। अभय कमांड सेंटर, साइबर सेल और उच्च टेक्नोलॉजी स्मार्ट पुलिसिंग का हिस्सा है।
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आदर्श स्थिति नहीं आसान…
प्रदेश में पुलिस अधिकारियों और थानों में स्टाफ की कमी के सवाल पर डॉ. यादव ने कहा कि सभी पदों पर भर्ती जैसी आदर्श स्थिति (posting) आसान नहीं है। फिर भी भर्तियों-पदोन्नति का दौर जारी है। सब इंस्पेक्टर-प्लाटून कमांडर (sub inspector), कांस्टेबल (constable) भर्ती इसका ही हिस्सा है।
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सुरक्षा 2020 की पहली प्राथमिकता
डॉ. यादव ने कहा कि आमजन की सुरक्षा पुलिस की साल 2020 की पहली प्राथमिकता है। मादक द्रव्यों पर अंकुश, किशोरों को नशे से दूर रखना, महिला-बालिका सुरक्षा (child and women security) और सडक़ सुरक्षाओं (road safety)को लेकर अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। सामुदायिक सहयोग के लिए पुलिस लोगों के बीच जा रही है।