
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री। फोटो- पत्रिका
अजमेर। पुष्कर में सोमवार से बागेश्वर धाम के उपासक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की तीन दिवसीय हनुमंत कथा और दरबार का भव्य आगाज हुआ। कथा मंच से शास्त्री ने भक्ति, धर्म और समाज से जुड़े कई मुद्दों पर बेबाक विचार रखते हुए श्रद्धालुओं से आस्था में स्थिर रहने और सनातन पर गर्व करने का संदेश दिया।
कथा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि यदि जीवन में भक्ति नहीं है तो जीवन का अर्थ भी अधूरा है। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि भक्ति करने वाला व्यक्ति एक जगह टिककर रहे और मन को स्थिर रखे। उन्होंने कहा कि फोटो खिंचवाने के समय भले ही कई लोग साथ दिखाई देते हैं, लेकिन संकट के समय कोई साथ नहीं खड़ा होता। सोशल मीडिया के दोस्त काम नहीं आते, इसलिए परमात्मा का दामन थाम लो, फिर भटकना नहीं पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया को साधने के बजाय जगदीश को साधना चाहिए।
इससे पहले पुष्कर में मीडिया से बातचीत करते हुए शास्त्री ने कहा कि हिंदुओं को अपने धर्म पर गर्व होना चाहिए। उन्हें चार बच्चे पैदा करने चाहिए। उन्होंने बेटियों को आईएएस, आईपीएस, काली और दुर्गा जैसी सशक्त भूमिकाओं में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने नाचने वाली बेटियां नहीं बनने का अनुरोध किया। साथ ही उन्होंने जनसंख्या और धर्मांतरण जैसे विषयों पर भी अपनी राय रखी। उनके अनुसार आर्थिक तंगी, अशिक्षा और अंधविश्वास धर्मांतरण के प्रमुख कारण हैं। उन्होंने कहा कि अमीर वर्ग को गरीबों का सहयोग करना चाहिए, अंधविश्वास दूर करने के लिए भक्ति जरूरी है और अशिक्षा खत्म करने के लिए शिक्षा पर जोर देना होगा।
इधर, रविवार रात करीब 9 बजे राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे तिलोरा गांव स्थित एक होटल में धीरेंद्र शास्त्री से मिलने पहुंचीं। बताया जा रहा है कि उन्होंने संदेश भेजकर लगभग 20 मिनट इंतजार किया, जिसके बाद दोनों के बीच करीब एक घंटे तक बंद कमरे में चर्चा हुई।
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इससे पूर्व रविवार को निकली कलश यात्रा में भी श्रद्धालुओं का उत्साह देखने लायक रहा। नवखंडीय हनुमान मंदिर से सैकड़ों महिलाएं लाल चुनरी ओढ़कर और जल से भरे कलश लेकर बैंड और डीजे पर बजते भजनों के साथ नाचते-गाते निकलीं। यात्रा वराह घाट चौक, ब्रह्म चौक और ब्रह्मा मंदिर मार्ग से होती हुई जाट विश्राम स्थली पहुंची। रास्ते भर जगह-जगह पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया और बागेश्वर धाम के जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री रविवार को तय कार्यक्रम से करीब पांच घंटे पहले ही पुष्कर के पास तिलोरा गांव स्थित रिसॉर्ट पहुंच गए। उनका मूल कार्यक्रम शाम 5 बजे किशनगढ़ एयरपोर्ट पहुंचने और शाम 7 बजे पुष्कर आने का था, लेकिन कोयम्बटूर का कार्यक्रम रद्द होने के कारण वे दोपहर करीब 2 बजे ही किशनगढ़ एयरपोर्ट से तिलोरा पहुंच गए। यहां आयोजन समिति के अध्यक्ष गौरीशंकर शर्मा, पवन शर्मा, कैलाश रेनबो शर्मा सहित अन्य पदाधिकारियों ने उपरणा पहनाकर उनका स्वागत किया।
Updated on:
23 Feb 2026, 4:44 PM IST
Published on:
23 Feb 2026, 4:42 PM IST
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