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पहले नहीं की परवाह, हाईकोर्ट के फैसले के बाद भागदौड़

राजस्व बार को पक्ष सुने बगैर सर्किट बेंच का आदेश करने पर आपत्ति , फैसला होने के बाद अब रीकॉल की मांग कर रहे राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर की ओर से गत सप्ताह राजस्व मंडल की सर्किट बेंच जोधपुर में पांच दिन लगाए जाने के मामले में राजस्व मंडल वकीलों की स्थिति सांप निकलने के बाद लाठी पीटने जैसी नजर आ रही है।

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अजमेर

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Dilip Sharma

May 24, 2023

Revenue Board Head Quarters Ajmer

खंडवा. घटनास्थल पर कार्रवाई करते पिपलौद पुलिस।,खंडवा. घटनास्थल पर कार्रवाई करते पिपलौद पुलिस।,Revenue Board Head Quarters Ajmer

अजमेर. राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर की ओर से गत सप्ताह राजस्व मंडल की सर्किट बेंच जोधपुर में पांच दिन लगाए जाने के मामले में राजस्व मंडल वकीलों की स्थिति सांप निकलने के बाद लाठी पीटने जैसी नजर आ रही है। राजस्व मंडल के वकील अब फैसले से असंतुष्ट होकर रीकॉल करने की अर्जी दायर करने की तैयारी में हैं। लेकिन अब अगले सप्ताह से हाईकोर्ट में ग्रीष्मावकाश शुरू हो जाएगा। ऐसे में प्रकरण की सुनवाई जुलाई माह से पहले होती नजर नहीं आ रही। हालांकि जोधपुर हाईकोर्ट का 15 मई का आदेश अंतरिम आदेश है। ऐसे में मूल रिट के फैसले से पहले रीकॉल की अर्जी राजस्व मंडल के वकीलों के लिए संजीवनी साबित हो सकती है।सर्किट बेंच को लेकर 25 साल से चल रही जद्दोजहद

राजस्व मंडल के गठन के बाद वर्ष 1972 से ही सर्किट बेंच जाने की परंपरा रही है। इस दौरान संभाग स्तर पर सर्किट बेंच जाया करती थी। 1998 में जोधपुर खंडपीठ ने राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की याचिका पर पहली बार सर्किट बेंच को जोधपुर में स्थायी रूप से लगाने के आदेश दिए। सुप्रीम कोर्ट तक मामला जाने के बाद प्रकरण हाईकोर्ट को लौटा दिया। जिसमें राजस्व बार की याचिका खारिज कर दी। वर्ष 2001 में यह केस रिपोर्ट भी हुआ।वर्ष 2022 में फिर याचिका लगाई

राजस्थान हाईकोर्ट लॉयर एसोसिएशन के नाथू सिंह व अन्य ने एक अन्य याचिका गत वर्ष लगाकर राजस्व मंडल की बेंच सहित कर बोर्ड व अन्य कुछ अधिकरण की बेंच जोधपुर में लगाने की मांग की। कथित तौर पर बहस के दौरान राजस्व बार का पक्ष सुने बिना ही अंतरिम फैसला कर दिया। अब राजस्व बार पदाधिकारी व वरिष्ठ वकील जयपुर की दौड़ लगा रहे हैं। प्रकरण को रीकॉल करने के लिए अर्जी दायर की जाएगी लेकिन इसकी सुनवाई अब जुलाई में होगी। मूल याचिका में भी जुलाई में सुनवाई होगी।

इनका कहना है

प्रकरण में आदेश की प्रमाणित प्रतिलिपि मिलने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। इसके बाद सरकार से मार्गदर्शन लेंगे।

महावीर प्रसाद, निबंधक, राजस्व मंडल, अजमेर