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ब्यावर का तेजा मेला बना भाजपा व कांग्रेस के बीच राजनीतिक ‘अखाड़ा ’

नगर परिषद में सभापति पद को लेकर दोनों दलों के बीच विवाद असली जड़, कभी सम्मान नहीं मिलने तो कभी आमंत्रण पत्र में नाम प्रिंट को लेकर रही तनातनी, मंगलवार को आमंत्रित अतिथियों के अलावा अन्य को सम्मानित करने से उपजा विवाद

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ब्यावर के तेजा मेले में सम्मान समारोह के दौरान तकरार करते कांग्रेस व भाजपा पार्षद

अजमेर. ब्यावर नगर परिषद में भाजपा व कांग्रेस के बीच तनातनी थम नहीं रही। प्रदेश में सत्ता बदलते ही भाजपा के सभापति के निलंबन की कार्रवाई हुई। बाद में अदालत से स्टे मिला तो फिर मौका मिलते ही कुर्सी से हटा दिया।

अब कांग्रेस का सभापति है। दोनों दलों में किसी न किसी बहाने विवाद बनता आ रहा है। नगर परिषद की ओर से आयोजित तीन दिवसीय तेजा मेले का आगाज विवादों के साथ हुआ था। आखिर तक विवादों ने पीछा नहीं छोड़ा। मेले के तीसरे व आखिरी दिन परम्परा के अनुसार भाजपा के अतिथि बुलवाए गए।

इस दौरान मंच पर कार्ड में प्रकाशित नाम के अलावा अन्य लोगों को भी मंच पर बुलवा लिया गया। इससे आपस में विवाद शुरू हो गया। आपसी तकरार के बीच ही सम्मान का कार्यक्रम किया गया। यह मामला खासा चर्चा का विषय रहा।

मेले के आखिरी दिन सांसद दीयाकुमारी, विधायक शंकरसिंह रावत, मंडल अध्यक्ष जयकिशन बल्दुआ व दिनेश कटारिया को आमंत्रित किया गया। सांसद तो शरीक होने नहीं पहुंची, जबकि विधायक व मंडल अध्यक्ष पार्टी पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं के साथ शामिल हुए।

मंच पर अतिथियों को सम्मानित किए जाने के दौरान आमंत्रित अतिथियों के अलावा अन्य का नाम भी शामिल कर लिया गया। इस दौरान मेला संयोजक व पार्षद दलपतराज सहित अन्य कांग्रेस पार्षदों ने इसका विरोध किया। इससे माहौल गरमा गया। आपस में तकरार शुरू हो गई। आयुक्त ने समझाइश का प्रयास किया, लेकिन दोनों ही पक्षों में आपस में बहस होती रही। इस विवाद के दौरान ही अतिथियों का सम्मान शुरू हो गया। आमंत्रित अतिथियों के लिए ही साफा व स्मृति चिह्न निकाले गए। मामला बढ़ता देख आयुक्त ने समझाइश कर सबका सम्मान कराकर मामला शांत करवाया।

सभापति व आयुक्त नहीं बैठे मंच पर

सम्मान किए जाने के दौरान मंच पर सभापति को भी आमंत्रित किया गया,लेकिन वह नीचे ही बैठी रही। मंच पर नहीं गई। आयुक्त भी कुछ देर के लिए मंच पर गए। आपस में विवाद बढ़ा तो वे भी मंच से नीचे उतर गए। समझाइश कर सम्मान समारोह करवाया।

अपनी-अपनी राय...

मेला संयोजक सम्पति बोहरा की मानें तो नगर परिषद की ओर से जो अतिथि आमंत्रित किए गए। उनको मंच पर बुलवाकर सम्मान किया जाना तय था। मनमर्जी से जिन्हें आमंत्रित नहीं किया गया। उन्हें भी मंच पर बुलवा लिया गया। इसका विरोध किया था। ऐसा किया जाना सही नहीं है।
दलपतराज मेवाड़ा, पार्षद के अनुसार उपसभापति ने लिखित में आखिरी दिन जिन अतिथियों के नाम दिए। नगर परिषद की ओर से उन्हें विधिवत तरीके से आमंत्रित किया गया।

कार्यक्रम के दौरान मनमर्जी से व्यवस्था को बाधित करने के लिए जिन्हें आमंत्रित नहीं किया गया। उन्हें भी मंच पर बैठा दिया। यह गलत परम्परा है। इसका विरोध किया था। उपसभापति सुनिलकुमार मूंदड़ा ने बताया कि मेला समिति की पहली बैठक में तय किया कि छोटे पदाधिकारियों को नहीं बुलवाया जाएगा। इसके अनुरूप ही अतिथियों के नाम लिखकर परिषद प्रशासन को दिए। बैठक में तय निर्णय की पालना नहीं कर इन्होंने कार्ड में छोटे पदाधिकारियों के नाम छाप दिए। इसके बावजूद दो दिन तक इसमें सहयोग किया। ऐसे में हमने समारोह में मौजूद पदाधिकारियों के सम्मान की बात रखी तो इन्हें बड़ा मन रखकर सहयोग करना चाहिए।