
festival of diwali in ajmer
अजमेर. रोशनी का पर्व दिवाली गुरुवार को मनाया जाएगा। लोग विधि-विधान से धन और ऐश्वर्य की देवी महालक्ष्मी का पूजन करेंगे। समूचा अजमेर शहर रंगबिरंगी लाइट और घर-प्रतिष्ठान दीपक से जमगगा उठे हैं।
पारम्परिक मान्यता के अनुसार धनतेरस से पंचदिवसीय महापर्व की शुरुआत हो गई है। अब लोग गुरुवार को महालक्ष्मी पूजन की तैयारियों में जुट गए हैं। बुधवार सुबह से बाजारों में रौनक दिख रही है। घरों, दुकानों, सरकारी और निजी कार्यालयों, चौराहों और आनासागर-गौरव पथ चौपाटी पर सतरंगी लाइटें लगाई हैं। शहर के कई बाजारों में तोरण द्वार और सजावट की गई है। रोशनी से समूचा शहर जगमगा उठा है।
बना रहे रंगोली-मांडणे
दीपोत्सव पर घरों में मुख्य द्वार और प्रवेश द्वारों पर रंगोली, पुष्प और स्वास्तिक बनाने की शुरुआत हो गई है। चूने-लाल मिट्टी और रंगों से सजावट की जा रही है। इसमें पारम्परिक और आधुनिक डिजाइन बनाए गए हैं। महिलाएं, बालिकाएं और बच्चे घरों की सजावट में जुटे हुए हैं।
यूं चलेगा महापर्व.....
रूप चतुदर्शी(छोटी दिवाली)-परम्परानुसार इसे शारीरिक सज्जा और आभूषण इत्यादि पहनने का दिन माना जाता है। रूप चतुदर्शी पर महिलाएं और पुरुष उबटन, चंदन, हल्दी और अन्य लेप लगाकर स्नान करने में जुटी हैं। इसे छोटी दिवाली भी कहा जाता है।
महालक्ष्मी पूजन (दिवाली)-कार्तिक कृष्ण अमावस्या पर महालक्ष्मी पूजन किया जाएगा। लोग विधि-विधान से महालक्ष्मी, सरस्वती और भगवान गणेश, और कुबेर का पूजन करेंगे। पंचामृत, पुष्प-माला, लौंग, इलायची, फल-मिष्ठान, पान, सिंूदर, गन्ना और अन्य सामग्री का प्रयोग किया जाएगा।
गोवद्र्धन पूजन (राम-राम)-दिवाली के अगले दिन गोवद्र्धन पूजन होगा। घरों के समक्ष गाय के गोबर से गोवद्र्धन पर्वत बनाकर महिलाएं परिवार में सुख-समृद्धि की कामना करेंगी। मान्यतानुसार भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र का घमंड का चूर करने के लिए अंगुली पर गोवद्र्धन पर्वत उठाकर बृजवासियों की अतिवृष्टि से बचाया था।
भैया दूज-भैया दूज को यम द्वितीया भी कहा जाता है। मान्यतानुसार भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर भैया दूज मनाई जाएगी।
Published on:
03 Nov 2021 09:35 am
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