
राजस्थान की भजनलाल सरकार ने नई शिक्षा नीति-2020 (NEP) के तहत प्रदेश के शैक्षणिक ढांचे में क्रांतिकारी बदलाव किया है। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने मंगलवार को 5वीं, 8वीं और 10वीं बोर्ड के परिणाम जारी करने के बाद पत्रकारों से मुखातिब होते हुए बताया कि सत्र 2026-27 से राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) की 10वीं बोर्ड परीक्षाएं वर्ष में दो बार आयोजित की जाएंगी। इस निर्णय से प्रदेश के करीब 20 लाख विद्यार्थियों को मानसिक तनाव से मुक्ति मिलेगी और उनका 'एक कीमती साल' बर्बाद होने से बच सकेगा।
शिक्षा विभाग द्वारा तैयार किए गए नए ब्लूप्रिंट के अनुसार, बोर्ड परीक्षाओं का आयोजन दो चरणों में किया जाएगा:
वर्तमान व्यवस्था में यदि कोई छात्र एक या दो विषयों में पिछड़ जाता है, तो उसे सप्लीमेंट्री परीक्षा या फिर पूरे एक साल का इंतजार करना पड़ता था।
राजस्थान बोर्ड का यह फैसला सीबीएसई (CBSE) के नक्शेकदम पर है। गौरतलब है कि सीबीएसई भी सत्र 2026 से 10वीं की परीक्षाएं दो बार आयोजित करने जा रहा है। राजस्थान देश के उन अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है जो नई शिक्षा नीति को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू कर रहे हैं।
परिणाम जारी करने के बाद शिक्षा मंत्री ने कहा, "हमारा उद्देश्य विद्यार्थियों पर से परीक्षा का बोझ कम करना है। अक्सर देखा जाता है कि एक दिन की खराब तबीयत या किसी दुर्घटना के कारण छात्र का पूरा साल खराब हो जाता है। अब 'सेकंड चांस' की व्यवस्था से बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे।"
राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, अजमेर के तहत हर साल करीब 10 लाख बच्चे 10वीं और करीब 9 से 10 लाख बच्चे 12वीं की परीक्षा देते हैं। इन 20 लाख परिवारों के लिए यह खबर किसी उत्सव से कम नहीं है। बोर्ड अब इस नई व्यवस्था के लिए परीक्षा केंद्रों, प्रश्नपत्रों के सेट और मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर विस्तृत गाइडलाइन जल्द ही जारी करेगा।
Updated on:
24 Mar 2026 02:44 pm
Published on:
24 Mar 2026 02:44 pm
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