
eighteen cows died
रानीसागर रीको के पास रेलवे फाटक के पास शुक्रवार रात ट्रेन की चपेट में आने से 18 गाय व बछड़ों की मौत हो गई। शनिवार सुबह हादसे का पता चलते ही विभिन्न संगठनों के लोग मौके पर पहुंचे और रोष जताया।
सूचना मिलने पर पहुंची सदर थाना पुलिस ने मौका मुआयना किया। मौके पर हिन्दूवादी संगठनों के कार्यकर्ताओं ने इस बात को लेकर रोष जताया कि 23 जनवरी को भी पीपलाज के पास 18 गाय व बछड़े ट्रेन की चपेट में आ गए थे।
इसके बाद भी रेलवे व प्रशासन ने मामले को गंभीरता नहीं लिया, जिसके चलते हादसे की पुनरावृत्ति हुई। हादसे के बाद मौके पर पहुंचे शिवसेना हिन्दुस्तान के वरिष्ठ उप जिला प्रमुख भंवरलाल कुमावत, ब्यावर शिवसेना नगर प्रमुख रवि पडियार, युवा सेना के कन्हैया साहू, चेतन चौहान व गोसेना वंदे गो मात्रम के जयंत सोलंकी ने घटना की निंदा की।
तीन गायों की खाल उतार ले गए
हादसे की सूचना मिलने पर पहुंचे गोसेवकों ने बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि तीन गायें दुर्घटना के बाद मौके पर तड़प रही हैं। इस पर वह चिकित्सक सहित वाहन लेकर मौके पर पहुंचे। इस दौरान देखा गया कि तीन गायें जो तड़प रही थीं उनकी अज्ञात लोग खाल उतार कर ले गए। मौके पर पहुंचे लोगों ने मामले की जांच कराने को लेकर नारेबाजी की।
साजिश का आरोप
रेलवे लाइन पर गायों की मौत के बाद मौके पर पहुंचे शिवसेना हिन्दुस्तान के वरिष्ठ उप जिला प्रमुख कुमावत व ब्यावर शिवसेना नगर प्रमुख रवि पडियार ने आरोप लगाया कि गायों की खाल उतारना और गायों को रेलवे लाइन पर तारों के मजबूत बेरिकेड में लाना सोची समझी साजिश भी हो सकती है।
बेरिकेड में कैसे पहुंची गायें
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार रानीसागर की निर्माणाधीन पुलिया से लेकर घटना स्थल तक रेलवे लाइन के दोनों आेर तारों के मजबूत बेरिकेड लगाए हुए हैं। ऐसे में सभी गायें व बछड़े बेरिकेड तारों के अंदर कैसे पहुंच गए।
जनवरी माह में भी घटना स्थल से कुछ दूरी पर ही बेरिकेड में जाने से गायें ट्रेन की चपेट में आकर मरी थीं। इसके बावजूद ठेकेदार व रेलवे प्रशासन ने सबक नहीं लिया और सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त नहीं की। यही कारण रहा कि शुक्रवार रात फिर दुर्घटना हो गई।
Published on:
17 Jun 2017 08:00 pm
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