
' घोड़ा कीजे काठ का, पिंड किजे पाषाण, बख्तर कीजे लोह का जद पहुंचे जैसाण...' और गढ़ दिल्ली गढ़ आगरो, अधगढ़ बीकानेर, भलो चिणायो भाटियों, सिरे जैसलमेर...जैसी प्रसिद्ध राजस्थानी कहावतें आज भी स्वर्णनगरी के वैभव और स्थापत्य की गवाही देती हैं। अब यही कहावतें और किस्से जैसलमेर के पर्यटन को नई दिशा दे रहे हैं। रेगिस्तान में टूरिज्म का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। पर्यटक अब केवल ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे उन स्थानों से जुड़ी कहानियों, लोककथाओं और अनुभवों को जीना चाहते हैं।
इस बदलाव ने स्टोरीटेलिंग टूर को एक नया ट्रेंड बना दिया है। गाइड अब केवल तिथियां और तथ्य नहीं बताते, बल्कि इतिहास को रोचक, भावनात्मक और जीवंत अंदाज में प्रस्तुत कर रहे हैं। सोनार दुर्ग पर्यटकों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण बना हुआ है। यहां गाइड किले की दीवारों, राजाओं की वीरता, युद्धों और जनजीवन की कहानियां इस तरह सुनाते हैं कि संकरी गलियों में चलते हुए पर्यटक खुद को उसी युग में महसूस करने लगते हैं। गड़ीसर तालाब पर जल संरक्षण, राजपरिवार की परंपराओं और धार्मिक आस्था से जुड़े प्रसंग सुनाए जाते हैं, जिससे यह स्थल केवल एक जलाशय नहीं, बल्कि इतिहास का जीवंत अध्याय बन जाता है।
पटवा हवेली में व्यापारिक समृद्धि, कारीगरी और व्यापारी परिवारों की जीवनशैली की कहानियां अतीत की झलक प्रस्तुत करती हैं। मंदिर पैलेस में शाही परंपराओं और राजघराने के निजी जीवन के प्रसंग पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। बड़ाबाग और व्यास छतरी में स्थापत्य और शासकों की स्मृतियों से जुड़े किस्से सुनाए जाते हैं, जबकि कुलधरा की वीरान बस्ती में रहस्य और लोककथाएं पर्यटकों को रोमांचित कर देती हैं।
रेगिस्तान का अनुभव भी अब कहानी से जुड़ गया है। सम सेंड ड्यून्स पर ऊंट सफारी के दौरान पुराने कारवां, व्यापार मार्ग और मरु जीवन की कहानियां सुनाई जाती हैं। लोंगेवाला में 1971 के युद्ध की वीरगाथाएं रोमांच भर देती हैं, वहीं तनोट मंदिर में आस्था और चमत्कार से जुड़े प्रसंग पर्यटकों को भावुक कर देते हैं। जैसलमेर में करीब 600 पंजीकृत गाइड हैं और 12 प्रमुख पर्यटन स्थल पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। हर वर्ष 10 से 12 लाख सैलानी स्वर्णनगरी पहुंचते हैं।
वरिष्ठ गाइड पदमसिंह राठौड़ के अनुसार, पहले केवल तारीख और घटनाएं बताने से पर्यटक जल्दी ऊब जाते थे, लेकिन अब घटनाओं को कहानी के रूप में जोड़ने से वे अधिक जुड़ाव महसूस करते हैं। गाइड नरेन्द्र छंगाणी बताते हैं कि सोशल मीडिया से प्रेरणा लेकर आवाज, भाव-भंगिमा और संवाद शैली के जरिए प्रस्तुति को आकर्षक बनाया जा रहा है, जिससे पर्यटक वीडियो बनाकर अनुभव साझा करते हैं। गाइड महेन्द्रसिंह तंवर के अनुसार, स्टोरीटेलिंग से टूरिज्म में भावनात्मक जुड़ाव बढ़ रहा है और पर्यटक स्थान को महसूस करने लगते हैं। इसी तरह अनिलसिंह भाटी का कहना है कि अभिनय और लोकभाषा के उपयोग से टूर अब एक लाइव अनुभव बन गया है, जिसमें पर्यटक केवल दर्शक नहीं, बल्कि कहानी का हिस्सा बन जाते हैं।
Published on:
03 Apr 2026 08:14 pm
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