
सीमावर्ती और मरुस्थलीय जैसलमेर जिला, जिसका क्षेत्रफल 38 हजार वर्गफीट से ज्यादा है। आकार के लिहाज से देश के चुनिंदा सबसे बड़े जिलों में शुमार किए गए जाने वाले जैसलमेर जिले में प्रशासनिक मुखिया के तौर पर एक महिला आइएएस अनुपमा जोरवाल को कमान सौंपी गई है। जोरवाल जैसलमेर 68 वीं जिला कलक्टर होंगी, लेकिन वह महज पांचवीं महिला कलक्टर होंगी। यह और बात है कि वे पूर्व में करीब ढाई माह तक जैसलमेर में कलक्टर रह चुकी हैं। उनसे अलावा अब तक शुचि त्यागी, डॉ. प्रतिभासिंह और टीना डाबी कलक्टर के दायित्व का निर्वहन कर चुकी हैं।
गौरतलब यह है कि इनमें से तीन महिलाओं में से दो तो छह माह कार्यकाल भी पूरा नहीं कर पाई। केवल शुचि त्यागी ने ही एक वर्ष कार्यकाल पूरा किया। गौरतलब है कि राज्य सरकारों ने विगत वर्षों में सरहद से सटे जिले में महिलाओं की प्रशासनिक क्षमता पर भरोसा जताया है और उन्हें अवसर भी दिया है, लेकिन कार्यकाल के लिहाज से समय बहुत कम दिया है। हाल में प्रतापसिंह को जैसलमेर कलक्टर पद से स्थानांतरित किया गया है और उनकी जगह पर अनुपमा जोरवाल को करीब 8 साल बाद पुन: जैसलमेर लाया गया है। प्रतापसिंह ने लगभग सवा दो साल का लम्बा कार्यकाल पूरा किया, जो अब तक के इतिहास में ललित के पंवार के बाद दूसरा सबसे दीर्घ समय है।
चाहे पुरुष कलक्टर हो या महिला, विशाल भू-भाग और छितराई ढाणियों वाले क्षेत्रफल के साथ विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाला रेगिस्तानी जिला प्रशासनिक क्षमता विकसित करने के लिए आदर्श माना जाता है। ऐसे में समूचे क्षेत्र को समझने के लिए ही 3-4 महीनों का समय लग जाता है। महिलाओं को कार्य करने के लिए न केवल संख्यात्मक बल्कि अवधि के रूप में भी अवसर कम ही मिल पाया है।
साल 2018 में जैसलमेर की कलक्टर बन कर आई अनुपमा जोरवाल कार्यकाल के लिहाज से दूसरी सबसे कम समय तक कलक्टर पद पर रहने वाली अधिकारी रह चुकी हैं। उनका कार्यकाल केवल ढाई माह का ही रहा। उनसे पहले एचसी पांडे हैं, जिनका कार्यकाल जैसलमेर में महज 20 दिनों तक रहा। जिले में कलक्टर पद पर सर्वाधिक सवा तीन साल तक डॉ. ललित के. पंवार रहे।
कलक्टर के लिए जैसलमेर में औसत कार्यकाल एक वर्ष माना जाता है, लेकिन फटाफट कलक्टर बदलने का सिलसिला वर्ष 2018 के बाद एकबारगी थमा था। वर्ष 2012 के बैच के आइएएस नमित मेहता ने 18 महीनों से ज्यादा समय तक कलक्टरी की। उनसे पहले विश्वमोहन शर्मा, मातादीन शर्मा व कैलाशचंद मीना सभी अधिकाधिक एक वर्ष तक यहां टिके। ओमप्रकाश कसेरा और अनुपमा जोरवाल तो चंद महीनों तक ही इस सीमांत जिले के कलक्टर रह पाए। हाल में स्थानांतरित प्रतापसिंह इस हिसाब से कहीं अधिक समय तक काम कर पाए। कलक्टर के तौर पर सत्यनारायण गुप्ता, एचसी देराश्री और अम्बरीश कुमार को 4-4 माह, केशव पुरी को 5 और बन्नेसिंह को 6 माह जैसलमेर में कलक्टर रहने का अवसर मिला। कार्य के लिहाज से इनका कार्यकाल भी काफी कम माना जाता है। वहीं ऐसे ही डॉ. एलके पंवार 3 वर्ष, प्रतापसिंह 27 माह, सज्जननाथ मोदी 25, पीएल अग्रवाल व एनएल मीना 23-23, पुरुषोत्तम अग्रवाल व सुधांश पंत 21-21, महेंद्र कुमार व्यास, ललित कोठारी व अशोक जैन 20-20 और एमके खन्ना 19 माह कलक्टर रहे।
Published on:
02 Apr 2026 08:38 pm
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