
करीब छह माह पूर्व सात समंदर पार कर सर्द ऋतु के प्रवास पर आई अधिकांश कुरजां स्वदेश लौटने के लिए उड़ान भर चुकी है। इनमें से छह कुरजां अपने साथियों से बिछुड़कर यहीं रह गई है, जो खेतोलाई गांव के सिलोतरा तालाब पर विचरण कर रही है। गौरतलब है कि चीन, मंगोलिया, कजाकिस्तान सहित मध्य एशिया से कुरजां पक्षी सर्दी के मौसम में देश के विभिन्न हिस्सों के साथ पश्चिमी राजस्थान में प्रवास करते है। सितंबर माह में इनकी आवक शुरू हो जाती है और फरवरी व मार्च माह तक यहां रहती है।
इस अवधि में मध्य एशिया में बर्फबारी होती है। ऐसे में कुरजां के लिए मौसम अनुकूल नहीं रहता है और भोजन नहीं मिल पाता है। इस कारण कुरजां देश में प्रवास करती है। इस वर्ष क्षेत्र के लाठी के पास डेलासर, सोढ़ाकोर, धोलिया, रासला, देगराय, खेतोलाई सहित कई तालाबों पर सैकड़ों की तादाद में कुरजां ने पड़ाव डाला था। वन्यजीवप्रेमी पंकज विश्नोई ने बताया कि खेतोलाई गांव के पास जलस्त्रोतों पर सैकड़ों कुरजां ने पड़ाव डाला था। मार्च माह के शुरुआती दिनों में कुरजां ने उड़ान भरना शुरू कर दिया था। मार्च माह के अंतिम सप्ताह तक अधिकांश कुरजां वतन वापसी के लिए यहां से निकल चुकी है। गुरुवार को खेतोलाई गांव के पास स्थित सिलोतरा तालाब पर छह कुरजां नजर आई है। ये कुरजां अपने समूहों से बिछुड़ गई है और वतन वापसी के लिए उड़ान नहीं भर सकी है।
आशंका जताई जा रही है कि ये छह कुरजां अब आगामी गर्मी का सीजन यहीं बिताएगी। जिससे इनके स्वास्थ्य पर भी संकट उत्पन्न हो सकता है। कुरजां के लिए 30 डिग्री तापमान अनुकूल है। जबकि सरहदी जिले में भीषण गर्मी के दौरान 45 से 48 डिग्री तक पहुंच जाता है। ऐसे में इनके बीमार होने की भी आशंका बढ़ गई है। यदि ये कुरजां जीवित रहती है तो अगले सीजन में जब कुरजां के झुंड वापिस आएंगे, तब इनकी वापिस मुलाकात हो सकती है।
पक्षी विशेषज्ञ सुमित डूकिया ने बताया कि शीतकालीन प्रवास के बाद वतन वापसी के दौरान कुरजां के पीछे रह जाने के कई कारण हो सकते है। कुछ कुरजां बीमार होने, कमजोर होने के कारण पीछे रह सकती है। संभावना है कि अब भी ये कुरजां वतन के लिए रवाना हो सकती है। यदि वतन वापसी नहीं करती है तो यहां भीषण गर्मी के दौरान स्वास्थ्य पर संकट उत्पन्न हो सकता है।
Published on:
02 Apr 2026 08:26 pm
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