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#election 2018: अजमेर की थी खुद की सरकार और विधानसभा,यहां बैठते थे मुख्यमंत्री

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ajmer assembly

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अजमेर की थी खुद की सरकार और विधानसभा,यहां बैठते थे मुख्यमंत्री

अजमेर. 30 मार्च 1948 को राजस्थान प्रांत का गठन होने के साथ ही जयपुर प्रदेश की राजधानी बनी लेकिन राजस्थान के बीचो बीच स्थित अजमेर में अपनी अलग विधानसभा हुआ करती थी। राजस्थान के पहले मुख्यमंत्री भले ही हीरालाल शास्त्री बने लेकिन अजमेर के पहले मुख्यमंत्री हरिभाऊ उपाध्याय हैं। यहां की विधानसभा में 30 विधायक हुआ करते थे और भागीरथ चौधरी यहां के पहले विधानसभा अध्यक्ष रहे हैं।
सी क्लास का दर्जा प्राप्त अजमेर मेरवाड़ा स्टेट का अपना अलग इतिहास रहा है। यहां आजादी के बाद भी 1 नवम्बर 1956 तक अपनी सत्ता, अपनी सरकार रही, जो राजस्थान से पूरी तरह अलग काम करती थीं। अजमेर में जयपुर रोड पर स्थित ब्रिटिशकालीन इमारत आज भी उस गौरवमयी इतिहास की गवाही देती है। आज इस इमारत में टीटी कॉलेज संचालित है। इसी में विधानसभा चलती थी।

अजमेर की सरकार में जनता ने 22 जनवरी 1952 को 30 विधायकों को चुनकर पहली विधानसभा का गठन किया था। हालाकि इसमें किशनगढ़ रियासत शामिल नहीं हुई थी। पांच साल तक अपनी सरकार चलाने के बाद 1 नवम्बर 1956 को राजस्थान में विलय के साथ अजमेर ने पहली बार राज्य की चुनावी चौपाल में अपना दावा ठोका था।

कॉलेज बनी विधानसभा

अजमेर-मेरवाड़ा स्टेट के लिए मीरशाह अली कॉलोनी जयपुर रोड स्थित शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय (टीटी कॉलेज और ऑफ, हाई स्कूल एंड इंटरमीडिएट एज्युकेशन) की इमारत को बतौर विधानसभा भवन के लिए चुना गया। राजस्थान विलय के बाद इसी इमारत मे पुन: टीटी कॉलेज स्थापित कर दिया गया।
यह आज भी संचालित है। 78 वर्ष पुरानी इमारत में मौजूद कक्ष में बड़ा सेंट्रल हॉल, महापुरुषों की तस्वीरें, ऊंची छत आज भी अजमेर मेरवाड़ा स्टेट के गौरव की गवाही देती है।

सरकार से वार्ता के संकेत नहीं

सातवें वेतनमान सहित अन्य मांगों को लेकर रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल 14 वें दिन भी जारी रही। गुरुवार को रोडवेज कर्मचारियों ने बस स्टैंड पर प्रदर्शन करते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कर्मचारियों का कहना था पिछले 13 दिनों से रोडवेज बसें बंद हैं। यात्रियों व कर्मचारियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है लेकिन सरकार के कान पर जूं नहीं रेंग रही है। कर्मचारी आगामी चुनाव में सरकार को सबक सिखाएंगे। राजस्थान परिवहन निगम के श्रमिक संगठनों के संयुक्त मोर्चा (एटक, सीटू, इंटक एसोसिएशन, बीजेएमएम,कल्याण समिति) के बैनल तले रोडवेज बस स्टैंड धरना दिया। रोडवेज कर्मचारी 17 सितम्बर से हड़ताल पर चल रहे हैं।