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नवीन दृष्टिकोण से अनुसंधान पर मिलेगी नई चुनौतियों का सामना करने की शक्ति

राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केन्द्र का स्थापना दिवस मनाया
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नवीन दृष्टिकोण से अनुसंधान पर मिलेगी नई चुनौतियों का सामना करने की शक्ति

नवीन दृष्टिकोण से अनुसंधान पर मिलेगी नई चुनौतियों का सामना करने की शक्ति

अजमेर.

राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केन्द्र तबीजी की ओर से रविवार को 20वां स्थापना दिवस मनाया गया। मुख्य अतिथि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के उप महानिदेशक (बागवानी) डॉ. ए. के. सिंह थे। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में वैज्ञानिक प्रगति दर सर्वाधिक है।

हमें नई उभरती चुनौतियों का सामना करने की शक्ति नवीन दृष्टिकोण से अनुसंधान करने पर ही मिलेगी। इस मौके पर संस्थान के वैज्ञानिक प्रकाशनों का विमोचन किया गया। संस्थान के वैज्ञानिकों एवं कर्मचारियों डॉ एस. एस. मीणा, एन. के. मीना, अरविन्द वर्मा, जी. के. त्रिपाठी, प्रदीप एवं श्रीराम को प्रशस्ति-पत्र एवं प्रक्षेत्रा कार्मिकों को नकद पुरस्कार प्रदान किए गए।

संस्थान के निदेशक डॉ. जी. लाल ने केन्द्र की उपलब्धियों की जानकारी दी। विशिष्ट अतिथि आर. के. मेनन अध्यक्ष डब्ल्यूएसओ, डॉ. होमी चेरियन, निदेशक डीएएसडी, डॉ. राघवेन्द्र, निदेशक भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान, अविकानगर, डॉ. आर. के. सावल, निदेशक ऊंट अनुसंधान केन्द्र बीकानेर, डॉ. पी. के. राय, निदेशक सरसों अनुसंधान निदेशालय भरतपुर थे।

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कृषि विज्ञान केन्द्र के परियोजना समन्वयक डॉ. डी. एस. भाटी, केवीके अंता, डॉ. डी. के. सिंह, प्रभारी केवीके अंता, केवीके बाड़मेर के वैज्ञानिक, प्रगतिशील किसान, बीजीय मसाला से जुड़े व्यापारी, हितधारक मौजूद रहे।

अतिथियों ने केन्द्र के अनुसंधान प्रक्षेत्रा का भ्रमण किया तथा वैज्ञानिकों से अनुसंधान कार्य की जानकारी ली। मुख्य अतिथि सिंह ने केन्द्र में स्थित आईटीएमयू इकाई के संग्रहालय, प्रदर्शनी स्टालों का उद्घाटन किया।

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बीजीय मसाला हितधारकों की इन्टरफेस परिचर्चा भी हुई। इसमें निदेशक डॉ. गोपाललाल, डॉ. कृष्णकांत एवं डॉ. एस. एन. सक्सेना ने प्रस्तुतीकरण किया तथा हितधारकों की शंकाओं का समाधान किया।

इंटरफेस सत्र के अध्यक्ष डॉ. सिंह ने हितधारकों एवं संस्थान के वैज्ञानिकों को कई महत्वपूर्ण सुझाव दिया। इसमें अन्तरराष्ट्रीय/राष्ट्रीय स्तर के शोधपत्रों/लेखों के प्रकाशन द्वारा बौद्धिक सम्पदा अधिकार संरक्षण पर विशेष बल दिया।

बैठक का प्रायोजन एम.आई.डी.एच. परियोजना के अंतर्गत, सुपारी एवं मसाला विकास निदेशालय, कालीकट एवं राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केन्द्र अजमेर द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। अंत में डॉ. एस. एन. सक्सेना ने धन्यवाद ज्ञापित किया।