
लोककला का 'उड़ा रंग, कलाकारों के दबे 'सुर!,लोककला का 'उड़ा रंग, कलाकारों के दबे 'सुर!,लोककला का 'उड़ा रंग, कलाकारों के दबे 'सुर!
चन्द्र प्रकाश जोशी
अजमेर. राजस्थानी कला संस्कृति को जीवंत रखने वाले मेलों, पशु मेलों में ही कलाकारों को ना तो मंच मिल रहा है, ना इन्हें बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं। राजस्थान में कई ऐसे मेले हैं जहां से लोक कलाकारों को नई पहचान मिलती है और राजस्थान की कला की झलक दिखाई देती है। मगर श्री कार्तिक पुष्कर पशु मेला लोक कला संस्कृति से जुड़े कलाकारों को मंच तक उपलब्ध नहीं करा सका है। जबकि राजस्थान के करीब 40 हजार लोक कलाकारों की लोक उत्सव व मेलों पर ही आजाविका टिकी है।
विदेशों तक है नाम. .पहचान
अजमेर जिले के कुछ लोक कलाकार राष्ट्रीय ही नहीं अन्तरराष्ट्रीय स्तर तक पहचान बना चुके हैं। अजमेर के लोक कलाकार एवं लोक वाद्य यंत्रों की गूंज देश-विदेश में गूंजती रही है। पुष्कर पशु मेला इन कलाकारों को संजीवनी देता रहा है। कालबेलिया, भाट जाति के कलाकार व लोगों की आजीविका सिर्फ लोककला से ही चल रही है। इस मेले में अजमेर ही नहीं राजस्थान भर के कलाकार अपनी प्रतिभा दिखाने आते रहे हैं। लेकिन इस बार लोक कलाकार अपनी प्रतिभा नहीं दिखा पाए हैं।
अजमेर की यह लोककला, कलाकार
-कालबेलिया नृत्य- अनिता, ज्योति, लीला।
-गैर नृत्य-सिलोरा क्षेत्र के लोक कलाकार।
-भंवई नृत्य
-चरी नृत्य-करूणा वर्मा
-राजस्थानी नाटक-गोपाल बंजारा, कृष्णकुमार पाराशर, अशोक शर्मा, सुशीला, किरण शर्मा।
-कच्ची घोड़ी नृत्य-सोहनलाल भाट, धर्मा भाट, राजेश भाट
-कठपुतली खेल-मदन भाट व टीम।
नगाड़ा वादन: नाथूलाल सोलंकी, हरि ढोली
पुष्कर मेले में इन वाद्य यंत्रों की इस बार नहीं गूंज
अलगोजे, इकतारा, नगाड़ा, ढोलक, सारंगी, शहनाई।
लोक कला से जुड़े कलाकार
40 हजार कलाकार राजस्थान में।
3 हजार कलाकार अजमेर जिले में।
600 लोग-महिलाएं कालबेलिया नृत्य।
20 लोग राजस्थानी नाटक से जुड़े अजमेर में
20 भंवाई नृत्य से जुड़े कलाकार अजमेर में।
राजस्थान के प्रमुख मेले
-श्री कार्तिक पुष्कर पशु मेला (अजमेर)
-श्री मल्लीनाथ पशु मेला तिलवाड़ा
-श्री बलदेव पशुमेला नागौर
-श्री गोमती सागर पशु मेला झालरापाटन (झालावाड़)
-श्री गोगामेड़ी पशु मेला गोगामेड़ी (हनुमानगढ़)
यह होना चाहिए
-श्री पुष्कर पशु मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रम।
-स्थानीय लोक कलाकारों को मौका।
-रेतीले धोरों में लोक वाद्य यंत्रों का वादन।
-लोक कलाकारों का सम्मान।
यह भी होते रहे आयोजन
-देशी-विदेशा पर्यटकों के मध्य साफा बांधो प्रतियोगिता।
-मूंछ प्रतियोगिता।
-मटकी दौड़ प्रतियोगिता
लोक संस्कृति के कार्यक्रम जरूरी
पुष्कर मेले में स्थानीय लोक कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का एक मात्र मौका मिलता है। अपनी लोक संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए मेले में सांस्कृतिक आयोजन होने चाहिए। अभी भी दो दिन बचे हैं। इनमें जिला प्रशासन व सरकार लोक कलाकारों को मंच उपलब्ध करवाए। करीब 3 हजार लोक कलाकार अजमेर जिले में है। राज्य में करीब 40 हजार लोक कलाकार ऐसे मौकों व मेलों का इंतजार करते हैं।
गोपाल बंजारा, लोक कलाकार
Published on:
18 Nov 2021 02:13 am
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