
food facility in campus
रक्तिम तिवारी/अजमेर.
विद्यार्थियों से पढ़ाई के बदले फीस और विकास शुल्क वसूलने वाला महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय बेहद गैर जिम्मेदार है। यहां विद्यार्थियों या आवश्यक कार्यों के लिए आने वालों को भोजन की इच्छा हो तो कैंटीन में ‘खाने ’ की सुविधा नहीं है। उनका परिसर के बाहर भागने के अलावा कोई चारा नहीं है। यहां नाममात्र के लिए कैंटीन संचालित हैं। उसका भी करीब तीन महीने पहले टेंडर खत्म हो चुका है।
विश्वविद्यालय में वर्ष 2012 में आधुनिक कैंटीन बनवाई गई। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा (तब मुख्य सचेतक) ने इसका उद्घाटन किया था। शुरुआत से कैंटीन कभी व्यवस्थित संचालित नहीं हो पाई। यहां कचोरा, समोसा, पेटिस, चाय-कॉफी ही उपलब्ध कराई गई। कई बार तो कैंटीन ठेका खत्म होने पर बंद भी हो चुकी है। इस बार भी पिछले तीन महीने से यह बंद पड़ी है।
नहीं मिलता परिसर में खाना
विश्वविद्यालय परिसर में कला, वाणिज्य, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, प्रबंधन, विधि और बीएड संकाय के कोर्स संचालित हैं। यहां करीब 1100 विद्यार्थी पढ़ते हैं। इसके अलावा करीब 250 कर्मचारी, 18 शिक्षक और 6 अधिकारी कार्यरत हैं। परिसर में रोजाना दूसरे शहरों से कई विद्यार्थी या उनके परिजन, आगंतुक कामकाज के लिए आते-जाते हैं। इनमें से किसी को भूख लगे तो कैंटीन से उल्टे पांव लौटने के सिवाय कोई चारा नहीं है। खाना खाने के लिए उन्हें परिसर से बाहर करीब दो से तीन किलोमीटर दूरी तय करनी पड़ती है।
केवल दिखावटी कैंटीन
परिसर में संचालित कैंटीन केवल दिखावटी है। यहां पेटिस, समोसा, बिस्किट, नमकीन, कचौरी, चाय के अलावा कुछ नहीं मिलता। विश्वविद्यालय का स्टाफ तो यहां आना भी पसंद नहीं करता। कर्मचारी अक्सर अजमेर-बीकानेर राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित थडिय़ों पर चाय-कॉफी पीते हैं। भूख लगने पर विद्यार्थी या आगंतुक भी इन्हीं थडिय़ों पर कचोरी-समोसे खाकर पेट भरते हैं। कैंटीन में सफाई व्यवस्था भी ठीक नहीं है।
इन संस्थानों की शानदार कैंटीन...
राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर-भोजन और सभी फास्ट फूड
जयनारायण व्याय विवि जोधपुर-भोजन और अन्य सामग्री
एम.एल. सुखाडिय़ा विवि उदयपुर-दाल, चावल, राजमा, रोटी और अन्य
जेएनयू दिल्ली-सभी फास्ट फूड और भोजन की थाली
निजी विश्वविद्यालय-भोजन, फास्ट फूड, साउथ इंडियन, चाइनीज आइटम
Published on:
7 May 2019, 7:44 AM IST
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