घर वालों ने छोड़ दिया ठोकरें खाने को, विदेशी दम्पत्ति ने दिया यूं सहारा

घर वालों ने छोड़ दिया ठोकरें खाने को, विदेशी दम्पत्ति ने दिया यूं सहारा

raktim tiwari | Publish: Nov, 11 2018 08:14:00 AM (IST) Ajmer, Rajasthan, India

www.patrika.com/rajasthan-news

चंद्रप्रकाश जोशी/अजमेर।

परिवार से उपेक्षित एवं विशेष आवश्यकता वाले दो साल के मासूम की जिन्दगी में उस समय नया मोड़ आ गया जब उसे ‘गोद’ लेने के लिए यूएसए के दम्पती लोहागल स्थित राजकीय निराश्रित बालगृह पहुंचे। दम्पती ने मासूम को गोद में थामा तो उनका चेहरा दमक उठा। मासूम मां का आंचल पाकर खुश तो हुआ मगर नजरें झुका कर यह जानने को उत्सुक था कि अब जिन्दगी उसे कहां ले जाएगी।

केम्ब्रिज (यूएसए) निवासी भारतीय मूल के प्रबल चक्रवर्ती एवं उनकी पत्नी वेनेथा जूलिया दोनों इंजीनियर हैं। उनके कोई संतान नहीं होने पर भारतीय मूल के बच्चे को गोद लेने का मानस बनाया। चक्रवर्ती भारतीय मूल (कोलकाता) के होने की वजह से उनकी शुरू से इच्छा थी कि अगर कोई बच्चा गोद लेंगे तो भारतीय मूल का ही लेंगे।

ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से चक्रवर्ती दम्पती ने आवेदन किया। इसके तहत अजमेर के राजकीय लोहागल स्थित राजकीय बालिका गृह में दो वर्षीय एवं विशेष आवश्यकता वाले बच्चे का चयन किया। औपचारिता पूरी होने पर सोमवार को दम्पती अजमेर में लोहागल स्थित राजकीय बालिका गृह पहुंचा और बच्चे को साथ लेकर यूएसए जाने के लिए दिल्ली रवाना हो गए।

बालिका गृह अधीक्षक अदिति माहेश्वरी एवं प्रबंधक फरहाना खान ने दम्पती को बच्चा सुपुर्द किया। इस भावुक पल में बच्चों व अधिकारी, कार्मिकों की आंखें नम हो गई। प्रबंधक खान के अनुसार विशेष आवश्यकता वाले बच्चे को स्वस्थ बनाए रखने के लिए हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. सुशील चौधरी एवं विजिटिंग डॉक्टर जयप्रकाश की मेहनत के चलते बच्चा अब चल फिर ही नहीं बल्कि दौड़ सकता है। दम्पती के अनुसार वे केम्ब्रिज में ही बच्चे को अच्छी शिक्षा दिलाने के साथ परवरिश करेंगे।

इस प्रक्रिया के बाद सौंपा बच्चा

राजकीय बालिका गृह में शिशु गृह के दोवर्ष के परित्यक्त बालक को किशोर न्याय अधिनियम, 2015 एवं भारत सरकार की ओर से जारी बच्चों के दत्तक मार्गदर्शी सिद्धांत, 2017 के तहत अन्तरराष्ट्रीय दत्तक ग्रहण योजना के अन्तर्गत यूएसए के दम्पती को सौंपा गया।

दम्पती को प्राधिकृत विदेशी दत्तक ग्रहण अभिकरण (कारा) की अभिशंसा एवं भारत सरकार के केन्द्रीय दत्तक ग्रहण अभिकरण (एएफ एए) के अनुमोदन के बाद पारिवारिक न्यायालय, अजमेर की ओर से जारी एडोप्शन डिक्री द्वारा बालक को दत्तक ग्रहण में दिए जाने के आदेश दिए गए थे।

इसके अनुसार ऐसे लावारिस, अभ्यर्पित, परित्यक्त बच्चे जिनको विधि मुक्त घोषित किए जाने के बाद 60 दिनों तक भारतीय दम्पत्तियों की ओर से दत्तक ग्रहण के लिए स्वीकार नहीं किया जाता है, वे बच्चे विदेशी दत्तक ग्रहण में दिए जाते हैं।

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

Ad Block is Banned