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वन्य जीव शिकारियों के खिलाफ ऑनलाइन दर्ज होगी एफआईआर

वन विभाग 1 अप्रेल से करेगा शुरूआत। वेब पोर्टल पर शिकारियों के फोटो भी होंगे अपलोड।

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illegal hunters

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रक्तिम तिवारी/अजमेर.

वन्य जीव शिकारियों के खिलाफ अब एफआईआर ऑनलाइन दर्ज होगी। राज्य के सभी वन मंडलों में 1 अप्रेल से इसकी शुरुआत होगी। वन एवं पर्यावरण मंत्रालय सहित विभाग के पोर्टल पर शिकारियों के नाम-पते, फोटो और वन्य जीव अधिनियम में कार्रवाई का ब्यौरा अपलोड होगा।

अजमेर, जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा, बीकानेर सहित राज्य के सभी वन मंडलों में वन्य जीवों का शिकार जारी है। शिकारी पैंथर, मोर,जंगली सूअर, काले हिरण सहित अन्य वन्य जीवों का शिकार करते हैं। इसके लिए वे बंदूक, जहरीले दाने अथवा लोहे का फंदा इस्तेमाल करते हैं।कागजों में दर्ज होती है एफआईआरवन विभाग हर साल शिकारियों को पकड़ता है। इनके खिलाफ वन्य जीव अधिनियम के तहत कार्रवाई होती है। लेकिन एफआईआर कागजों में दर्ज की जाती है। शातिर किस्म के शिकारी तो विभाग के एक से दूसरे रेंज में कई मामलों में सक्रिय रहते हैं। अदालतों से मिली सजा भुगतने के बाद वे पुन: अवैध कारोबार में लिप्त हो जाते हैं। विभाग की वेबसाइट पर शिकारियों का कोई ऑनलाइन डाटा-फोटो उपलब्ध नहीं है।

ताकि कंप्यूटरीकृत रहे डाटा
हाईटेक दौर में विभाग काफी पीछे है। शिकारियों का कंप्यूटरीकृत डाटा तैयार करने के लिए ऑनलाइन एफआईआर सिस्टम बनाया जा रहा है। 1 अप्रेल से राज्य के मंडलों में शिकारियों के खिलाफ ऑनलाइन एफआईआर दर्ज होगी।अधिकारी-कर्मचारी कागजों में एफआईआर दर्ज करने के बाद तत्काल उसे विभाग के पोर्टल पर अपलोड करेंगे। यह सीधे वन एवं पर्यावरण मंत्रालय पर भी लिंक होगी।

होगा शिकारियों का पूरा ब्यौरा
जिस तरह पुलिस क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रेकिंग सिस्टम (सीसीटीएनएस) के तहत ऑनलाइन एफआईआर दर्ज करती है। उसी तरह वन विभाग ने ऑनलाइन एफआईआर सिस्टम तैयार किया है। वन्य जीवों के शिकार, अथवा वन भूमि पर कब्जे जैसे मामलों पर ऑनलाइन एफआआर दर्ज होगी। शिकारियों के नाम-पते, फोटो और आपराधिक रिकॉर्ड वेबपोर्टल मिलेगा।

यह मिलते हैं अंग

राज्य में कई बार शिकारी पकड़े जाते रहे हैं। विभाग को इनके पास सियार के सिर की हड्डी, शेर के दांत-नाखून, हाथी दांत, कछुए, बिच्छू, पाटोगोह के अंग और अन्य वन्य जीवों के अंग मिल चुके हैं। वाइल्ड लाइफ ब्यूरो के मुताबिक राज्य में प्रतिवर्ष आधा दर्जन से अधिक बड़े मामले तस्करी के होते हैं।

अजमेर मंडल के चर्चित मामले
-अजगरा में 24 और भैरूंखेड़ा में 21 मोरों का शिकार
-पदमपुरा में मादा पैंथर का शिकार
-सरवाड़-अरवड़ क्षेत्र में खरमौर-गोडावण के शिकार


अब शिकारियों के खिलाफ ऑनलाइन एफआईआर दर्ज होगी। इनके फोटो और पूरी जानकारी भी पोर्टल पर रहेगी। विभाग मुख्यालय सिस्टम तैयार कर रहा है।
सुदीप कौर, उप मंडल वन संरक्षक