
Malangs and Kalandars showed amazing feats
ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती के 812 वें उर्स में शिरकत करने महरौली से पैदल आए सैकड़ों कलंदरों ने शुक्रवार को पारंपरिक जुलूस निकाला। इस दौरान गजब का जज्बा देखने को मिला। मलंगों-कलंदरों ने एक से बढ़कर एक हैरतअंगेज कारनामे दिखाकर लोगों को दांतों तले अंगुली दबाने पर मजबूर कर दिया। बाद में उन्होंने दरगाह में छडिय़ां पेश की।
झांझ, ढोल-ताशों के बीच गंज स्थित उस्मानी चिल्ले से छडि़यों का जुलूस रवाना हुआ। कलंदरों ने चाकू की नोक पर आंख निकालना, तलवारबाजी, शरीर पर कोड़े बरसाना, जीभ में से मोटी सुई आर-पार करना, गाल के बीच से तलवार निकालना जैसे कई हैरतअंगेज कारनामे दिखाए। कलंदरों में कौसर अली बाबा (असम), बाबा मियां महरौली, महबूब बाबा (कलियर), जलालुद्दीन (कोलकाता), शुभचंद साधु (ओडिशा) के कलंदर शामिल हुए।
मजार शरीफ से संदल उतारने की है परम्परा
अजमेर. सूफी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती के मजार शरीफ पर सालभर चढ़ाए जाने वाला संदल खिदमत के वक्त उतारा गया। तबर्रुक के रूप में संदल लेने के लिए अकीदतमंद में होड़ मच गई। खादिम सैयद कुतुबुद्दीन सखी ने बताया कि ख्वाजा साहब के उर्स से पहले चांद की 28 तारीख को दरगाह में सालभर चढ़ाए जाने वाले संदल को उतारे जाने की परम्परा है। यह संदल जायरीन में तबर्रुक के रूप में वितरित किया जाता है।
चांद नजर आया
इस्लामिक माह रजब का चांद देखने के लिए 29 चांद रात यानी शुक्रवार को हिलाल कमेटी की बैठक हुई। इसमें अजमेर और आस-पास के इलाकों अथवा किसी अन्य शहर में चांद दिखने की सूचना मिली। बड़े की पीर की पहाड़ी से तोप दागकर और दरगाह परिसर में शादियाने व नगाड़े बजाए गए।
शुरू हुई रस्में
शुक्रवार रात से ही सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के 812वें उर्स की धार्मिक रस्में शुरू हो गई। दरगाह के महफिल खाने में उर्स की पहली महफिल हुई।
छह रजब को कुल की रस्म
छह रजब यानी 18 जनवरी को छोटे कुल की रस्म होगी। महफिल खाने में कुरानख्वानी होगी। कव्वाल रंग और बधावा पढ़ेंगे। दोपहर 1 बजे फातेहा पढ़ी जाएगी। दरगाह दीवान को खिलत पहनाकर दस्तारबंदी होगी। दीवान आस्ताना शरीफ में कुल की रस्म अदा करने जाएंगे। इसके बाद जन्नती दरवाजा बंद किया जाएगा। देशभर से आए कलंदर-मलंग दागोल की रस्म अदा करेंगे।
Published on:
12 Jan 2024 09:57 pm
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