27 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

अजमेर

औद्योगिक क्षेत्र में सुविधाएं जुटाएं. . लघु उद्योगों की कृषि भूमि का हो नियमन

- फ्यूल चार्जेज के नाम पर लाखों रुपए के बिजली के बिल माफ हों -'राजस्थान पत्रिका' ने जानीं उद्यमियों की समस्याएं अजमेर में औद्योगिक क्षेत्रों का दिनों-दिन विस्तार हो रहा है। हाल ही पालरा क्षेत्र के विस्तार को सरकार ने हरी झंडी दी है। गेगल विस्तार, सथाना में सिरेमिक हब, मसूदा व अन्य क्षेत्रों में भी नवीन औद्योगिक क्षेत्र प्रस्तावित हैं। सेदरिया औद्योगिक क्षेत्र नॉन रीको में होने के कारण यहां आधारभूत ढांचा विकसित नहीं हो पा रहा।

Google source verification

अजमेर

image

Dilip Sharma

Jul 04, 2023

अजमेर. अजमेर में औद्योगिक क्षेत्रों का दिनों-दिन विस्तार हो रहा है। हाल ही पालरा क्षेत्र के विस्तार को सरकार ने हरी झंडी दी है। गेगल विस्तार, सथाना में सिरेमिक हब, मसूदा व अन्य क्षेत्रों में भी नवीन औद्योगिक क्षेत्र प्रस्तावित हैं। सेदरिया औद्योगिक क्षेत्र नॉन रीको में होने के कारण यहां आधारभूत ढांचा विकसित नहीं हो पा रहा। इसके नियमन की भी मांग उद्यमियों ने की है। इसके अलावा भूखंड आवंटन की दर, मूलभूत सुविधाएं, साफ-सफाई व सड़क की कई ऐसी समस्याएं हैं जिनसे उद्यमियों को रोजाना दो-चार होना पड़ता है। राजस्थान पत्रिका ने मंगलवार को परबतपुरा औद्योगिक क्षेत्र में उद्यमियों से परिचर्चा कर उनकी समस्याओं को जाना।

अजमेर जिला लघु उद्योग संघ के अध्यक्ष सुगनचंद गहलोत ने संघ की ओर से औद्योगिक क्षेत्र की कई समस्याओं पर चर्चा की। इस दौरान उद्यमी व लघु उद्योग संघ के कार्यकारिणी सदस्य प्रदीप जैन, रविश कुमार, विजेन्द्र पाल सिंह व आभास सिंघल प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

सेदरिया: लैंड यूज बदलें, नियमन करेंयह नॉन रीको क्षेत्र है। यहां लघु व मध्यम वर्ग के सौ से अधिक उद्यम हैं। इस भूमि का भू उपयोग परिवर्तन व्यावसायिक किया जाकर नियमन जरूरी है। जिससे उद्यमियों को बैंक आदि से ऋण मिल सके। ताकि उद्यम विकसित कर सकें।

परबतपुरा-माखुपुरा: रीको क्षेत्र में लगें साईनेज

यहां सड़कें, नालियां,स्ट्रीट लाईटें साईनेज बोर्ड आदि लगाएं जाएं। ताकि औद्योगिक क्षेत्र में आने वाले लोगों को लेन व सेक्टर अनुसार गंतव्य तक पहुंचने में परेशानी न हों।यह भी भी बोले उद्यमी. . .

फ्यूल सरचार्ज माफ हो – विद्युत बिलों में फ्यूल सरचार्ज जोड़ कर आ रहा है। इससे उद्यमियों का बिल दो से तीन लाख तक पहुंच गया। इसे माफ करना चाहिए। बहुत भार पड़ रहा है।

भूमि आवंटन दर न्यूनतम हो – रीको जब भूमि आवंटन करता है तो उसकी दरें बहुत अधिक होती हैं। ऐसे में वास्तव में उद्यम लगाने वाला उद्यमी खरीद नहीं पाता।

80 प्रतिशत के बाद हो नीलामी – उद्यमियों का कहना है कि किसी भी नए औद्योगिक क्षेत्र के 80 प्रतिशत भाग को आवंटन करने के बाद शेष भाग की नीलामी हो। अभी पहले भूखंड से ही नीलामी करने के कारण भू कारोबारी उच्च दरों पर भूखंड ले लेते हैं। जिससे वास्तविक उद्यमी भूखंड क्रय नहीं कर पाता।