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इसके लिए एक मिनी फिल्म के माध्यम से उन्हें सरकारी स्कूलों की जानकारी देने के साथ ही स्कूलों में मिलने वाली नि:शुल्क पुस्तकें, साइकिल व छात्रवृत्ति की जानकारी ग्रुप में दे रहे हैं। इसका उद्देश्य यही है कि अधिक से अधिक विद्यार्थियों को नए सत्र में सरकारी स्कूलों से जोड़ा जा सके।
गत दिनों शिक्षा राज्यमंत्री वासुदेव देवनानी की ओर से परीक्षा परिणाम आने से पहले विद्यार्थियों को नई कक्षाओं में बैठाने के आदेश आने के बाद इस पर कार्य शुरू हुआ। सबसे अधिक दारोमदार ग्रामीण अंचल की स्कूलों पर है। शिक्षकों की कमी होने के कारण अभिभावक निजी स्कूलों में बच्चों को भेज रहे हैं।
फिल्म देगी संदेश
निदेशालय ने सरकारी स्कूलों में प्रवेश का महत्व बताने के लिए एनीमेशन से एक मिनट की संदेशात्मक फिल्म बनाई है। इसमें बालिका को घर की सफाई, खाना बनाना, दैनिक कार्यों को करते दिखाया है। वहीं भाई-बहन को कह रहा है कि पहले स्कूल चलें उसके बाद आकर साथ घर का काम निपटा लेंगे।
3.3 करोड़ बालिका हैं स्कूल से वंचित
फिल्म में यूएनईएससीओ के आंकड़े भी बताए हैं कि भारत में लड़कों के मुकाबले 3.3 करोड़ बालिकाएं आज भी ऐसी हैं जिन्होंने प्राथमिक स्कूल की दहलीज नहीं देखी। इनको आखर ज्ञान की जिम्मेदारी उठानी है।
यह दे रहे जानकारी
- अपने बच्चों भाइयों-बहिनों को राजकीय विद्यालयों में प्रवेश दिलाएं।
- उच्च योग्यताधारी एवं विषय विशेषज्ञों द्वारा गुणवत्तापूर्ण शिक्षण कार्य।
- सभी कक्षाओं की पुस्तकें नि:शुल्क उपलब्ध।
- कक्षा 1 से 8 तक शिक्षण शुल्क मुक्त।
- सरकारी स्कूलों में परीक्षा शुल्क मुक्त।यह दे रहे जानकारी
- कक्षा नवीं की छात्राओं को नि:शुल्क साईकिल वितरण।
- स्काउट गाइड की सुविधा।
- विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति की सुविधा।
- ओबीसी, एसबीसी, एससी एसटी को छात्रवृत्ति।
- विशेष योग्यजन को विशेष सुविधाएं छात्रवृत्ति, उपकरण स्कूल में रेम्प की सुविधा।
- स्कूल दूर से आने-जाने वाले विद्यार्थियों को ट्रांसपोर्ट भत्ता।
- पाठ्य सहगामी क्रियाओं का आयोजन।
- प्रतिभावान विद्यार्थियों को आगे लाने के लिए खेलकूद की व्यवस्था।
- छात्र-छात्राओं के लिए अलग से शौचालय की व्यवस्था।
- पोषाहार में गुणवत्ता का ध्यान रखना।
- विद्यार्थियों को फल का वितरण।
- व्यक्तित्व विकास के लिए प्रतियोगिताओं का आयोजन।
- बालिकाओं के सर्वांगीण विकास लिए अलग से मीना मंच।
इनका कहना है...
सरकारी स्कूलों का महत्व गांवों में चौपाल के माध्यम से बताने के साथ ही सोशल साइट वाट्सएप का भी सहयोग लिया जा रहा है। इस बार प्रवेशोत्सव पर विशेष कार्यक्रम होंगे।
- पूनमचंद वर्मा, प्राचार्य, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बराखन
Published on:
27 Mar 2017 05:39 pm
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