
gst tax not reduce on marble and granite
मदनगंज-किशनगढ।
जीएसटी काउंसिल की बैठक में लिए गए निर्णयों से छोटे कारोबारियों ने राहत की सांस ली है। छोटे कारोबारियों को बड़ी राहत मासिक रिटर्न की बजाय तिमाही रिटर्न भरने की छूट से मिली है। मार्बल-गे्रनाइट पर कर कम नहीं होने से मंडी के व्यापारियों को फिर निराशा हुई है।
जीएसटी काउंसिल की बैठक में छोटे कारोबारियों (डेढ़ करोड़ तक वार्षिक कारोबार) के लिए तिमाही रिटर्न की व्यवस्था होने, कम्पोजिट स्कीम की सीमा 1 करोड़ किए जाने, 50 हजार से अधिक दो लाख रुपए तक के सोने की खरीद पर पैनकार्ड की अनिवार्यता खत्म करने, रिवर्स चार्ज को 31 मार्च तक स्थगित करने, निर्यातकों को रिफंड प्रारंभ करने आदि निर्णयों से कारोबारियों को थोड़ी राहत मिली है। इससे बाजार पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा और दीपावली पर कारोबार अच्छा होने की उम्मीद बढ़ गई है।
इससे तनाव कम होगा और औपचारिकताएं कम होने से लागत में कमी आने के साथ-साथ अपने कारोबार पर ध्यान दे सकेंगे। सरकार को जीएसटी में सुधार की प्रक्रिया जारी रखनी चाहिए।
अरविंद गर्ग, पावरलूम उद्यमी
जीएसटी काउंसिल की बैठक में लिए निर्णयों से कारोबारी माहौल में आई निराशा दूर होगी। इससे छोटे कारोबारी जो जीएसटी से डरे हुए थे उनका डर अब दूर हो जाएगा।
जगदीश नारायण बंसल, अध्यक्ष, पावरलूम एसोसिएशन
कम होना चाहिए कर
कर विशेषज्ञ मालचंद गर्ग ने कहा कि किशनगढ़ का सबसे बड़ा कारोबार मार्बल-गे्रनाइट का है। अगर इन पर कर कम किया जाता तो क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को काफी लाभ मिलता और नया निवेश भी प्रारंभ होता। फिलहाल जीएसटी काउंसिल की बैठक में लिए निर्णयों से कारोबारी माहौल में सुधार आएगा। कम्पोजिट स्कीम की सीमा 1 करोड़ करने, रिवर्स चार्ज को 31 मार्च तक स्थगित करने आदि निर्णयों से बाजार की हालत थोड़ी सुधरेगी।
मार्बल मंडी में दिखी निराशा
जीएसटी कर कम नहीं होने से मार्बल मंडी के व्यापारियों में निराशा दिखी। मंडी के व्यापारियों का कहना है कि जब तक मार्बल-गे्रनाइट पर कर कम नहीं होगा तब तक बिक्री बढऩे की उम्मीद नहीं है। मंडी में ग्राहकों का आना कम हो गया है और विट्रीफाइड टाइल्स के कारण गलाकाट प्रतिस्पद्र्धा झेलनी पड़ रही है। अगर ऐसे ही हालत रहे तो मंडी के बंद होने का खतरा बढ़ जाएगा और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान पहुंचेगा। मार्बल मंडी से जयपुर , नागौर और अजमेर प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए है। इन तीनों जिलों के मजदूर भी बड़ी संख्या में यहां मजदूरी के लिए आते है। वहीं राज्य की खानों और देश भर से मार्बल-गे्रनाइट को खरीद कर यहां बिक्री के लिए तैयार किया जाता है। कुछ मात्रा में विदेशी माल की भी खरीद होती है। अगर मार्बल-गे्रनाइट पर कर में कमी की जाए तो भारी राहत मिलेगी।
Published on:
08 Oct 2017 11:19 am
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