17 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Happy Cheti chand: सिंधी खाली हाथ आए थे अजमेर, मेहनत से पाया ये मुकाम…

www.patrika.com/rajasthan-news

2 min read
Google source verification
sindhi culutre in ajmer

sindhi culutre in ajmer

अजमेर. सिंधी कभी खाली हाथ पाकिस्तान से अजमेर आए थे। आज इस समुदाय ने अपनी मेहनत से कामयाबी पाई है। पुरानी पीढ़ी द्वारा दशकों तक धार्मिक रस्म के तहत मनाए जाने वाला चेटीचण्ड 1970 के बाद से महोत्सव के रूप में बदलता चला गया है।

सिंधी समाज के साधन संपन्न होने के साथ ही इसका असर चेटीचण्ड के जुलूस में नजर आने लगा है। जुलूस को पिछले साल से भी बेहतर बनाने के लिए पूरा समाज दिल खोलकर पैसा खर्च करने लगा है। बेहतर झांकी निकालने की प्रतिस्पर्धा के चलते पिछले कुछ वर्षों से अनेक झांकियों पर एक से तीन लाख रुपए तक खर्च कर दिए जाते हैं।

युवाओं में जबरदस्त उत्साह
चेटीचण्ड के जुलूस को लेकर सिंधी समाज के युवा वर्ग में जबरदस्त उत्साह है। जुलूस के आगे लगभग 60 डांडिया दल में सैकड़ों युवा शिरकत करेंगे। कुछ अलग दिखने के लिए युवा वर्ग ने खास तैयारियां की हैं। प्रत्येक डांडिया दल ने रंगारंग और महंगी पोशाक बनवाई है। इसके अलावा अनेक युवकों ने जुलूस में विचित्र वेशभूषा पहनकर आने की भी तैयारी की है।

अत्याचार से बचाने के लिए लिया अवतार
सिंधियों के ईष्टदेव झूलेलाल ने सिंध के नसरपुर में विक्रम सम्वत 1007 चांद के लिए माता देवकी एवं पिता रतनराय के घर अवतार लिया। उस समय मिरख बादशाह के जुल्मों से तंग आकर सिंधी समाज के लोगों ने सिंधु नदी के तट पर अन्न जल त्याग कर भगवान से अवतार लेने की गुहार की। 40 दिन के उपवास के बाद झूलेलाल ने अवतार लिया। सिंधी समाज में चालीहो महोत्सव की परम्परा भी इसी लिए पड़ी।

13 वर्ष की उम्र में ब्रह्मलीन
भगवान झूलेलाल पृथ्वी पर 13 वर्ष की आयु तक ही रहे। इस दौरान उन्होंने बचपन, जवानी और बुढ़ापे के स्वरूप दिखाए। उनके करिश्माई व्यक्तित्व को देखकर सिंधी समाज के लोगों के अलावा अन्य समुदाय के लोग भी उनके मुरीद हुए।

पाक में भी उडेरोलाल
झूलेलाल की महिमा महज भारत ही नहीं पाकिस्तान में भी है। पाकिस्तान में मुस्लिम समाज के अनेक लोगों के बीच वे जिंदह पीर के नाम से विख्यात हैं। झूलेलाल के जन्मस्थल नसरपुर के पास रेलवे स्टेशन का नाम उडेरोलाल रखा गया है। पाकिस्तान के सक्खर शहर में जिंदह पीर की मजार है। इसी गांव में उडेरोलाल किला एवं मंदिर भी है जहां प्रतिवर्ष चेट और असू माह में तीन दिन मेला भरता है।

चेटीचंड सिंधी समाज का सबसे बड़ा त्यौहार है। इसे यादगार बनाने के लिए लोगों में काफी उत्साह है। चेटीचंड जुलूस एक तरह से अजमेर और समाज की शान है। इसे जोश और उमंग के साथ मनाने की तैयारी की जा रही है।

प्रभु होतचंद लौंगानी, मुख्य ट्रस्टी, झूलेलाल धाम दिल्ली गेट

चेटीचंड की शोभायात्रा में 65 झांकियों का समावेश होगा। इनके आगे युवाओं की डांडिया टीमें रंग-बिरंगे परिधानों में नाचती गाती चलेंगी। सिंधी समाज ही नहीं बल्कि पूरे शहर के लोग जुलूस में शामिल होने और स्वागत के लिए उत्सुक है।
जयकिशन पारवानी, सह-संयोजक, चेटीचंड जुलूस