
traditional food tips
अजमेर. दादी-नानी के पुराने नुस्खे काफी कारगर रहे हैं। खासतौर पर स्वास्थ्य की दृष्टि से उनके बताए-सुझाए नुस्खों पर हाईटेक पीढ़ी भी यदा-कदा अमल कर रही है। लजीज पकवान, जायकेदार सब्जियां, आचार और पापड़-आलू के चिप्स-मंगोड़ी तक घरों में ही बनाई जाती थी। दादी और नानी अपनी कुशलता से इन्हें लजीज बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ती थीं।
भारत में बरसों से संयुक्त परिवार पद्धति रही है। कई पीढिय़ों तक लोग एक घर में साथ-साथ रहते आए हैं। संयुक्त परिवार में सबसे अहमियत बुजुर्गों की रही है। जिनमें दादा-दादी, नाना-नानी की अहमियत थी। वक्त के साथ चाहे जमाना आधुनिक और हाईटेक हो गया पर परिवार में दादी और नानी के अनुभव अब तक काम आ रहे हैं। यही वो पीढ़ी है जो घर-परिवार और समाज को दिशा दे रही है।
यह है दादी-नानी के पास नुस्खों का खजाना
-जुखाम हो जाए तो काली मिर्च, तुलसी, लौंग, बड़ी इलायची मिश्री का काढ़ा
-खट्टी डकारें आएं तो गुनगुने पानी के साथ फांकें हींग, अजवाइन और नमक
-आंख पर लाल फुनसी (घुमारनी) हो जाए तो लगाएं लौंग को घिसकर
-पेट में दर्द हो तो नाभी पर लगाएं हींग का लेप
-शिशु जन्म के बाद महिलाओं को सवा महीने तक अजवाइन, सुपारी और अन्य सामग्री के लड्डू
-सर्दी में आटा-देशी काजू,बादाम डालकर बने लड्डू
-गर्मी में पेट की गर्मी शांत करने के लिए जौ-चने को पीसकर और शक्कर मिलाकर फांकें
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चाहिए तुरन्त नौकरी तो वोकेशनल कोर्स बेहतरीन विकल्प
रक्तिम तिवारी/अजमेर. इंजीनियरिंग क्षेत्र में त्वरित नौकरियों के लिए अब कौशल आधारित पाठ्यक्रम भी चलेंगे। इंजीनियरिंग कॉलेज में बी.टेक-एमटेक की पढ़ाई के साथ वोकेशनल की शरुआत होगी। यह कोर्स राजस्थान आईएलडी कौशल विश्वविद्यालय ने तैयार किए हैं।
सरकारी और निजी इंजीनियरिंग कॉलेज में करीब 60 हजार सीट हैं। रोजगार की अच्छे अवसरों के बावजूद यहां बी.टेक और एमटेक स्तर पर पारम्परिक कोर्स ही संचालित हैं। दूसरे राज्यों के इंजीनियरिंग कॉलेज में कौशल और वोकेशनल कोर्स की भरमार है। विद्यार्थियों को वोकेशनल कोर्स से उद्यम और रोजगार में लाभ हुआ है।
Published on:
24 Oct 2020 04:36 pm
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