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सरकारी अस्पताल में हार्ट की बाईपास सर्जरी का सपना अधूरा

सीटीवीएस की करीब 4 करोड़ लागत की मशीनें फांक रही हैं धूल, जेएलएन मेडिकल कॉलेज में शुरू हुआ था विभाग, ओटी भी बनाया, ड्रीम प्रोजेक्ट फेल : कार्डियो थौरेसिक एंड वैस्क्यूलर सर्जरी

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सरकारी अस्पताल में हार्ट की बाईपास सर्जरी का सपना अधूरा

सरकारी अस्पताल में हार्ट की बाईपास सर्जरी का सपना अधूरा

चन्द्र प्रकाश जोशी

अजमेर. जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में वर्ष 2015 में स्थापित कार्डियो थौरेसिक एंड वैस्कूलर सर्जरी (सीटीवीएस) विभाग के बावजूद हार्ट की बाईपास सर्जरी की सुविधा आज तक प्रारंभ नहीं हो पाई है। आज भी करोड़ों रुपए की मशीनें धूल फांक रही हैं।

स्मार्टसिटी अजमेर में चिकित्सा सुविधाओं को स्मार्ट बनाने में पूर्व मुख्यमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट आज भी अधूरा है। कार्डियोलॉजी विभाग के द्वितीय तल पर बने सीटीवीएस में वर्तमान में तीन सहायक आचार्य तो नियुक्त हैं, लेकिन बाईपास सर्जरी शुरू नहीं हो पाई है।

पीपीपी मोड पर डॉ. गोयल ने की थी 5 सर्जरी

वर्ष 2016 में जयपुर हार्ट हॉस्पिटल के सीटीवीएस स्पेशलिस्ट डॉ. विक्रम गोयल ने पीपीपी मोड पर सीटीवीएस का प्रारंभ किया। शुरुआती दो महीनों में 5 लोगों की बाईपास सर्जरी की थी जो सफल रही। इसके बाद विशेषज्ञ डॉ. मोहित दवे ने करीब 50 से अधिक वैस्कूलर सहित अन्य सर्जरी की। वर्तमान में भी पिस्टूला बनाने के साथ वैस्कूलर सर्जरी डॉ. अनुराग गोयल कर रहे हैं। दो अन्य सहायक आचार्य भी नियुक्त हैं।

फैक्ट फाइल

2015 : में सीटीवीएस की स्थापना हुई।2016 : में पीपीपी मोड पर बाईपास सर्जरी की शुरुआत हुई।

05 : बाईपास सर्जरी यहां डॉ. गोयल ने की।1.10 : लाख मरीजों को कार्डियोलॉजी में ओपीडी (प्रतिवर्ष)

10 : हजार मरीज आईपीडी (भर्ती) (प्रतिवर्ष)5 : हजार मरीजों की एंजियोप्लास्टी होती रही है (प्रतिवर्ष)

सीटीवीएस में यह मशीनें

- मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर- हार्टलंग्स मशीन

- परफ्यूजन मशीन- दस बैड का आईसीयू

- वेंटीलेटर व मॉनिटर उपलब्ध- दो वार्ड मय पलंग, बेड उपलब्ध

सरकार व जनप्रतिनिधि करें प्रयास तो यह भी संभव

राज्य सरकार या फिर अजमेर जिले के विधायक प्रयास करें तो जयपुर एसएमएस में सीटीवीएस के करीब 7 प्रोफेसर में से रोटेशन के अनुसार प्रति सप्ताह जेएलएन मेडिकल कॉलेज में डेपुटेशन करवा सकते हैं, ताकि उनकी देखरेख में हार्ट की बाईपास सर्जरी यहां कार्यरत तीन सहायक आचार्य (चिकित्सकों) की मदद से पोस्ट केयर करवाई जा सकती है।

इनका कहना है...

कार्डियोलॉजी विभाग में सीटीवीएस में पीपीपी मोड पर 2016 में बाईपास सर्जरी हुई, लेकिन किन्ही कारणों से डॉ. गोयल के साथ एमओयूू निरस्त हो गया। अजमेर में बाईपास सर्जरी होने से अजमेर संभाग के मरीजों को राहत मिलेगी।

- डॉ. आर. के. गोखरू, कार्डियोलॉजिस्ट एवं पूर्व प्रधानाचार्य जेएलएन मेडिकल कॉलेज