22 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Historical Fact: अढ़ाई दिन के झोपड़े में बने हुए हैं स्वास्तिक चिन्ह

अढ़ाई दिन का झोपड़ा वास्तुकला का नायाब नमूना है। इसमें सात मेहराब और सत्तर स्तम्भ हैं।

2 min read
Google source verification
अढ़ाई दिन का झोपड़ा

Historical Fact: अढ़ाई दिन के झोपड़े में बने हुए हैं स्वास्तिक चिन्ह

अंदरकोट इलाके में स्थित अढ़ाई दिन का झोपड़ा इन दिनों चर्चाओं में है। दिल्ली के संगठन महाराणा प्रताप सेना ने जो स्वास्तिक के चिन्ह वायरल किए हैं, वे दरअसल अढ़ाई दिन के झोपड़े में है। सूफी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह से 1 किलोमीटर दूर अंदरकोट में यह निर्मित है।

वास्तुकला का नायाब नमूना

अढ़ाई दिन का झोपड़ा वास्तुकला का नायाब नमूना है। इसमें सात मेहराब और सत्तर स्तम्भ हैं। प्रत्येक स्तम्भ में बारीक वास्तुकला दिखाई देती है। यह अविभाजित भारत की बेजोड़ कारीगरी का नमूना है।

क्या कहते हैं इतिहासकार

अढ़ाई दिन का झोपड़ा चौहानकालीन संस्कृत पाठशाला अथवा सरस्वती कंठाभरण रहा है। यह इतिहास में दर्ज है। यहां ढाई दिन का उर्स भरता था। कालान्तर में इसका स्वरूप बदला गया था।

डॉ. नरसिंह परदेशी, लेखक राय पिथौरा पृथ्वीराज चौहान पुस्तक एवं इतिहासकार

अढ़ाई दिन के झोपड़े का इतिहास सब जानते हैं। कतिपय संगठनों अथवा किसी व्यक्ति द्वारा इसे प्रमाणित या प्रचारित करने की आवश्यकता नहीं है।

ओंकारसिंह लखावत, पूर्व अध्यक्ष, धरोहरण संरक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण

Read More: मेघनाथ सिखाएंगे भारतीय दूतावास में योग

अजमेर. विदेश मंत्रालय ने महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय के योग विभाग के छात्र रहे मेघनाथ का योग शिक्षण के लिए भारतीय दूतावास में चयन किया है । कुलपति प्रो. अनिल शुक्ला ने उनका स्वागत किया। वे मौजूदा वक्त महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय बीकानेर में अतिथि शिक्षक के रूप में सेवारत हैं।

नागौर जिले के पीह निवासी मेघनाथ ने बताया कि योग से संबंधित शिक्षण महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय के योग विज्ञान एवं मानवीय चेतना विभाग से प्राप्त किया। स्नातक एवं पीजी की उपाधि हासिल की। इस दौरान पांच बार राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करने के अलावा योगा सर्टिफिकेशन बोर्ड से राष्ट्रीय गुणवत्ता का तृतीय स्तर सर्टिफिकेट हासिल किया। भारतीय दूतावास स्थित विवेकानंद वैलनेस सेंटर में योग की कक्षाएं होंगी। साथ ही फिजी के निकटवर्ती विश्वविद्यालयों ,स्कूलों व संगठनों में योग शिक्षण कार्य किया जाएगा। उन्होंने सफलता का श्रेय शिक्षक डॉ. लारा शर्मा, डॉ. असीम जयंती सहित माता-पिता एवं मित्रों को दिया है।