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Holi festival: अनुराधा पौड़वाल और हरिहरन के पुष्कर में गूंजेंगे भजन

इनमें नामचीन संगीतकारों के अलावा ग्रामीण-शहरी प्रतिभाएं और लोक कलाकार भी प्रस्तुति देंगे।

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अनुराधा पौड़वाल और हरिहरन के पुष्कर में  गूंजेंगे भजन

अनुराधा पौड़वाल और हरिहरन के पुष्कर में गूंजेंगे भजन

तीर्थनगरी पुष्कर में फाल्गुन माह में लोक संस्कृति के रंग निखरेंगे। यहां इस बार 4 से 7 मार्च तक अंतर्राष्ट्रीय होली महोत्सव मनाया जाएगा। चार दिवसीय महोत्सव में कई धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। इनमें नामचीन संगीतकारों के अलावा ग्रामीण-शहरी प्रतिभाएं और लोक कलाकार भी प्रस्तुति देंगे।

राजस्थान पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष धर्मेन्द्र राठौड़ ने बताया कि राज्य सरकार ने पुष्कर में धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अंतर्राष्ट्रीय होली महोत्सव मनाने का फैसला किया है। इसके तहत सरोवर के घाटों, नए और पुराने मेला मैदान, प्रजापिता ब्रह्मा मंदिर के निकट ब्रह्म वाटिका में कार्यक्रम होंगे। इसको लेकर जिला कलक्टर अंशदीप, एसपी चूनाराम जाट, अतिरिक्त कलक्टर राजेंद्र सिसोदिया, देविका तोमर, पुष्कर उपखंड अधिकारी नवीन कुमार सहित अन्य अधिकारियों से चर्चा की गई।

महाआरती से शुरुआत

राठौड़ के अनुसार 4 मार्च को पुष्कर सरोवर में महाआरती होगी। पुष्कर के घाटों पर दीप प्रज्ज्वलन किया जाएगा। इसमें पुष्करवासी, देशी-विदेशी पर्यटक, प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि शामिल होंगे।

गूंजेंगे सुरीले भजन

महोत्सव के दौरान मशहूर पार्श्व गायिका अनुराधा पौड़वाल और हरिहरन का भजन कार्यक्रम होगा। पर्यटन निगम इनसे बातचीत में जुटा है। भजन संध्या 4 मार्च को होगी। इसी तरह 7 मार्च को पार्श्व गायक अमित त्रिवेदी संगीतमय प्रस्तुति देंगे। राज्य के मशहूर और स्थानीय कलाकारों को भी प्रस्तुति का मौका मिलेगा।

कैमल और हॉर्स शो

महोत्सव के तहत 5 मार्च को कैमल और हॉर्स शो होगा। नगाड़ा वादन, महाआरती का आयोजन होगा।

पुष्कर सरोवर में दीपदान

6 मार्च को चंग की थाप पर कच्छी घोड़ी नृत्य होगा। सरोवर के सभी घाटों पर दीपदान किया जाएगा। इसमें आमजन, पर्यटक, विद्यार्थी, पुलिसकर्मी, स्काउट-गाइड हिस्सा लेंगे।

गुलाब-गुलाल से खेलेंगे होली

राठौड़ के अनुसार पुष्कर को लाल और गुलाबी गुलाब के लिए पहचाना जाता है। लिहाजा होली महोत्सव के तहत 7 मार्च को गुलाब की पंखुडि़यों और पारंपरिक गुलाल से होली खेली जाएगी। रंगों का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। इससे विदेशी पर्यटकों को भी भारतीय परम्पराओं, तीज-त्योहारों की जानकारी मिलेगी।