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देशी-विदेशी पक्षियों का घरौंदा ‘बदहाल’

राष्ट्रीय पक्षी दिवस आज : रहती हैं पक्षियों की कई प्रजातियां, राजस्थान पत्रिका की पहल पर स्मार्ट सिटी योजना के तहत सागरविहार कॉलोनी में 26 हजार 400 वर्ग मीटर क्षेत्र में बर्ड पार्क बनाया गया है।
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देशी-विदेशी पक्षियों का घरौंदा ‘बदहाल’

देशी-विदेशी पक्षियों का घरौंदा ‘बदहाल’

अजमेर. शहर में देशी-विदेशी पक्षियों का ‘घरौंदा’ बदहाल हो रहा है। सागर विहार कॉलोनी स्थित बर्ड पार्क में वाहनों और आनासागर झील में नौकायन-गंदगी और मानवीय हलचल से पक्षियों की आवक कम हो गई है। यही हाल रहा तो पक्षियों को भोजन-आश्रय पर संकट बढ़ सकता है। राजस्थान पत्रिका की पहल पर स्मार्ट सिटी योजना के तहत सागरविहार कॉलोनी में 26 हजार 400 वर्ग मीटर क्षेत्र में बर्ड पार्क बनाया गया है। इस पर करीब 117 लाख रुपए खर्च हुए हैं।

इन पक्षियों का डेरा

आनासागर झील-सागर विहार क्षेत्र में स्पॉट बिल डक, आईबिस, कॉमन मैना, परपल ग्रे हेरॉन, इग्रेट (व्हाइट ग्रे), मूरहेन, मैलार्ड, कॉमन टील, रफ, किंगफिशर, स्पून बिल, स्पॉट बिल्ड डक, नॉर्दन शॉवलर सहित 50 से अधिक प्रजातियां रहती हैं। गर्मियों में यहां स्पॉटबिल डक, कॉमन मैना, मूरहेन प्रजनन करते हैं।

मानवीय हलचल से नुकसानबर्ड पार्क की पाल पर बाइक दौड़ाने से पक्षियाें की कई प्रजातियां पुष्कर रोड पुरानी विश्राम स्थली में शिफ्ट हो गई हैं। आनासागर झील-गौरव पथ और टापू के आस-पास नौकायन, कचरा-जलकुंभी से तीन-चार साल में कई पक्षियाें की आवक लगातार कम हो गई है। झील में प्राकृतिक वेटलैंड खत्म हो रहा है।

बोर्ड टूटे, पार्क बदहालमन्नू प्रताप सिंह ने बताया कि पार्क में पक्षियों के फोटो और प्रजातियों के नाम लिखे गए थे। असामाजिक तत्वों ने बोर्ड तोड़ दिए हैं। विक्रम सिंह ने बताया कि पार्क में गंदगी-कचरा फैला रहता है। शांत वातावरण में शोरगुल बढ़ रहा है। प्रशासन इसकी सार-संभाल नहीं कर रहा है।

फैक्ट फाइल

1 हजार साल पुराना है आनासागर100 से ज्यादा पक्षियों की प्रजातियां दिखती हैं झील में

13 फीट है भराव क्षमता20 से 30 प्रजातियों के प्रवासी पक्षियों की आवक

50 फीसदी वैटलेंड हुआ खत्म

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