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Innovation: ईआरपी सिस्टम बन रहा कॉलेज-विद्यार्थियों के लिए मददगार

नाम-पते कोर्स सहित फीस और अन्य जानकारियां एक क्लिक पर लेना आसान। स्मार्ट लाइब्रेरी कार्ड से किताबें को ऑनलाइन इश्यू कराना संभव।

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ERP System in engineering college

ERP System in engineering college

अजमेर.

राज्य के इंजीनियरिंग कॉलेजों, शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए ईआरपी सिस्टम काफी मददगार साबित हो रहा है। जहां कॉलेजों के पास विद्यर्थियों-शिक्षकों के नाम पते, कोर्स, फीस सहित अन्य जानकारियां एक क्लिक पर उपलब्ध हैं। वहीं विद्यार्थियों के लिए ई-मेल भेजने, सूचनाएं चेक करने के साथ-साथ स्मार्ट लाइब्रेरी कार्ड से किताबों को ऑनलाइन इश्यू कराना आसान हो रहा है।

एंटरप्राइस रिसोर्स प्लानिंग (ईआरपी) दरअसल चेन सिस्टम में काम करता है। इससे किसी छोटे अथवा बड़े समूह को ऑनलाइन जोड़कर सूचनाओं का आदान-प्रदान, डाटा संग्रहण किया जा सकता है। इस तकनीक को अजमेर के बड़ल्या और महिला इंजीनियरिंग सहित अन्य कॉलेज नियमित कामकाज में कर रहे हैं।

यह मिल रहे फायदे: एफएक्यू

-विद्यार्थियों के नाम-पते और अन्य डाटा उपलब्ध

-सेमेस्टर/कोर्स, उपस्थिति, फीस का ब्यौरा

-ई-मेल, मोबाइल और अन्य जानकारियां संग्रहित

-सूचनाओं का आदान-प्रदान करना आसान

-शिक्षकों की योग्यता, टाइम टेबल का ब्यौरा

-कैंपस प्लेसमेंट, सेमिनार-वर्कशॉप की जानकारी

स्मार्ट लाइब्रेरी कार्ड

अजमेर के महिला इंजीनियरिंग सहित बांसवाड़ा और झालावाड़ इंजीनियरिंग कॉलेज में डिजिटल ऑनलाइन लाइब्रेरी तैयार की कई है। विद्यार्थी, शिक्षक, शोधार्थी और विशेषज्ञ इंजीनियरिंग ब्रांच की किताबें, जर्नल और पत्र-पत्रिकाएं ऑनलाइन पढ़ रहे हैं। तीनों कॉलेज की इंजीनियरिंग और अन्य संकाय की पुस्तकें ई-फॉर्मेट में तब्दील की गई हैं। जल्द ई-कंटेंट-उपलब्ध लिंक से घर बैठकर किताबें पढ़ी जा सकेंगी।

इन फीचर्स पर चल रहा कामकाज...

-देश के सभी आईआईटी से सूचनाओं का आदान-प्रदान

-टॉप संस्थानों से रिसर्च-अकादमिक चर्चा

-डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन लाइव क्लास

-सरकारी दफ्तरों के लिए ईआरपी सिस्टम तैयार करना

-आईटी सेवाओं का ग्रामीण क्षेत्र तक विस्तार

फैक्ट फाइल (सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज)

16 सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज

40 से ज्यादा टेक्निकल ब्रांच

10 हजार से ज्यादा विद्यार्थी अध्ययनरत

02 टेक्निकल यूनिवर्सिटी से सम्बद्ध

ईआरपी सिस्टम में विद्यार्थियों-शिक्षकों से जुड़ा पूरा डाटा ऑनलाइन उपलब्ध है। डाटा को नियमित अपडेट करना आसान है। जल्द विद्यार्थियों के ई-वॉलेट भी तैयार होंगे। डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल शैक्षिक कार्यों में धीरे-धीरे और बढ़ाया जाएगा।

डॉ. रेखा मेहरा, प्राचार्य इंजीयिरिंग कॉलेज बड़ल्या