
engineering college ajmer
रक्तिम तिवारी/अजमेर.
इंजीनियरिंग कॉलेज बड़ल्या में छात्राएं हॉस्टल के बंदोबस्त संभाल रही हैं। मैस में भोजन की गुणवत्ता से लेकर हॉस्टल में अनुशासन, कल्याणकारी कार्यक्रम और स्वच्छता की जिम्मेदारी उन्हीं पर है।
ताकि सीखें सेल्फ मैनेजमेंट
कॉलेज का मानना है, कि छात्राएं बी.टेक की डिग्री लेने के बाद सरकारी और निजी कम्पनियों में नौकरी करेंगी। इन्हें ऑफिस टीम से दफ्तर के अलावा ईवेंट, वर्कशॉप, सेमिनार, प्रजेंटेशन, और अन्य कार्यक्रम कराने होंगे। लिहाजा कॉलेज कैंपस से ही छात्राओं में मैनजमेंट और लीडरशिप क्वालिटी विकसित किया जाए तो उन्हें नौकरियों में परेशानी नहीं होंगी। साथ ही वे आत्मनिर्भर बन सकेंगी।
आईआईटी-आईआईएम भी देते ट्रेनिंग
देश के आईआईटी और आईआईएम में भी बी.टेक, एम.टेक और मैनजमेंट की डिग्री लेने वाले छात्र-छात्राओं को आत्मनिर्भर बनाने की ट्रेनिंग दी जाती है। इन संस्थानों में भी विद्यार्थी हॉस्टल, कैंपस स्वच्छता, अकादमिक कार्यक्रम, खेलकूद, सांस्कृतिक कार्यक्रम, लैब मेंटेनेंस और अन्य कमेटियों में संस्थानों की मदद करत हैं। इसका एकमात्र मकसद स्मार्ट टेक्नोक्रेट और प्रबंधन कौशल विकसित करना है।
यह हैं विभिन्न कमेटियां
हॉस्टल मैनेजमेंट कमेटी-हर्षिता मीना, प्राची, रानु सिंहल, रक्षामैस कमेटी-दीक्षा, रक्षिता जाजू, प्रांजल अग्रवाल, अक्षिता जैनहॉस्टल अनुशासन समिति-शिखा जावा, मीनू चौधरी, मनीषा मीना, सृष्ठि उपाध्यायहॉस्टल स्टूडेंट वेलफेयर-आसिफा खान, आशिमा अंसारी, मीनल, रिया जैनहॉस्टल एन्यवारमेंटल कमेटी-चंचल सिंह, अंजली, कंचन शर्मा, भविका कुमारी
फैक्ट फाइल
1997 में हुई थी कॉलेज की स्थापना
09 टेक्निकल ब्रांच हैं कॉलेज में
2500 विद्यार्थी अध्ययनरत
2017 में स्थापित बीटीयू से सम्बद्ध
गल्र्स हॉस्टल में मैस में गुणवत्ता युक्त भोजन से लेकर स्वच्छता-अनुशासन कार्य छात्राएं संभाल रही हैं। इसका मकसद छात्राओं में प्रबंधन-लीडरशिप गुण विकसित कर आत्मनिर्भर बनाना है। भविष्य में वे कहीं भी नौकरी करेंगी तो पूरी टीम को इसका लाभ मिलेगा।
डॉ. रेखा मेहरा, प्राचार्य इंजीनियरिंग कॉलेज बड़ल्या
Published on:
09 Dec 2021 04:58 pm
बड़ी खबरें
View Allअजमेर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
