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इंश्योरेंस कंपनी का टोल फ्री नम्बर बंद, कैसे मिले किसानों को नुकसान का मुआवजा

- जिले में मात्र सवा दो सौ किसान ही दे पाए हैं बारिश से हुए नुकसान जानकारी - जिलेभर में खरीफ फसलों में साढ़े 27 हजार हेक्टेयर में हुआ है खराबा, सर्वाधिक 25 हजार हेक्टेयर बाजरा में

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अजमेर

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Dilip Sharma

Sep 30, 2022

Crop Insurance Scam: फर्जी दस्तावेज से उठा चुके लाखों का फसल बीमा क्लेम

Crop Insurance Scam: फर्जी दस्तावेज से उठा चुके लाखों का फसल बीमा क्लेम

नितिन भाल

धौलपुर. प्राकृतिक आपदाओं से फसलों को बचाने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में फसलों को बीमित करने के दावे किए जा रहें हो लेकिन, धौलपुर जिले के लिए अधिकृत फसल बीमा कंपनी ने एक फिर किसानों की मुसीबत बढ़ा दी है। हाल यह है कि बीमा कंपनी का टोल फ्री नम्बर 18004196116 स्विच ऑफ ही आता है। ब्लॉक स्तर पर किसानों की समस्या सुनने के लिए बीमा कंपनी के अधिकृत प्रतिनिधि तक नहीं हैं। जिस कारण किसान पिछले दिनों बारिश के कारण नुकसान के दायरे में आई फसलों की सूचना तक बीमा कंपनी को नहीं दे पा रहे हैं। जिसका नतीजा है कि जिले के किसान खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। जिले में पिछले दिनों हुई बारिश के कारण करीब साढ़े 27 हजार हेक्टेयर में खरीफ की फसलों में नुकसान हुआ है। इंश्योरेंस कंपनी का टोल फ्री नम्बर बंद होने के कारण महज 225 किसान ही खराबे की सूचना दे पाए हैं।
मुआवजे से बचने को बंद करते नंबर

किसानों का आरोप है कि प्राकृतिक आपदा के समय किसानों को मुआवजा नहीं देना पड़े इसके लिए कंपनी अपने टोल फ्री नम्बर को ही अक्सर बंद रखती है। वहीं अधिकारी भी फोन नहीं उठाते हैं। नतीजन नुकसान होने पर किसान अपनी शिकायत ऑनलाइन रेकार्ड नहीं करवा पाता है। हालांकि, सीजन की शुरूआत के समय बीमा कंपनी का जागरुकता रथ गांव-गांव जाता है लेकिन इसके बाद बीमा कंपनी गांव से मुंह मोड़ लेती है। प्रदेश सरकार के नियमों के बावजूद बीमा कपंनी की ओर से किसान को पॉलिसी नहीं दी जाती है और न ही खराबे के समय कंपनी का कोई प्रतिनिधि गांव आता है।

विवादों में रही कंपनी

धौलपुर जिले में फसल बीमा के लिए अधिकृत कंपनी प्रदेश के अन्य जिलों की तुलना में कम मुआवजा देने या सर्वे को लेकर पारदर्शिता नहीं बरतने के कारण शुरू से विवादों में रही है। इसके विरोध में किसान संगठन, सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी जनप्रतिनिधियों सहित जिला प्रशासन को कई बार ज्ञापन दे दिया लेकिन, मामले की सुनवाई नहीं की जा रही है। जिले में किसानों की संख्या और साल में दो बार फसलों की बुवाई होने के कारण फसल बीमा के प्रीमियम की राशि अधिक है। किसान संगठनों के अनुसार यही कारण है कि बीमा कंपनी धौलपुर जिले को छोडऩा नहीं चाहती है।

औसतन 70-80 लाख का प्रीमियम

धौलपुर जिले के लिए वर्ष 2019 खरीफ सीजन से इसी कंपनी को फसल बीमा के लिए अधिकृत किया जा रहा है। हर सीजन में बीमा कंपनी जिले के हजारों किसानों से प्रीमियम लेती है, लेकिन खराबा होने पर मुआवजा कुछ किसानों को ही मिल पाता है। बीमा कंपनी रबी और खरीफ दोनों सीजन के दौरान बतौर प्रीमियम किसानों से औसतन 70-80 लाख रुपए लेती है। बीमा कंपनी फसल बीमा शुरू करने से पहले ब्लॉक स्तर पर कंपनी के प्रतिनिधि लगाने की घोषणा तो करती है लेकिन, ब्लॉक स्तर पर कोई प्रतिनिधि नहीं मिलता है।

जिले में मात्र 8600 बीमित किसान

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को लेकर जिले के किसानों में भी बेरुखी रही है। जिलेभर में मात्र 8600 किसानों ने ही फसलों का बीमा करा रखा है। बीमा कंपनी की ओर से वर्ष 2021 में करीब 64 लाख की बीमा राशि का भुगतान किया गया था। बीमा कंपनी की ओर से कटी फसल का ही मुआवजा दिया जाता है।

टेबल 1...

जिले में खरीफ फसलों में बारिश से हुआ नुकसान

फसल बुवाई प्रभावित नुकसान का प्रतिशत

बाजरा 88470 25600 25 से 30
तिल 2720 950 30 से 35

ज्वार 2027 656 10 से 15
ग्वार 335 150 20 से 35

मूंग 200 80 20 से 25

टेबल 2...

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में शिकायत कराने वाले किसान

पोर्टल से टोलफ्री नंबर से कुल
85 65 225

इनका कहना है

लाइन बिजी होने पर टोलफ्री नंबर स्विच ऑफ बताता है। किसान ई-मित्र या एप पर भी भी आवेदन कर सकते हैं। बीमा का लाभ उठाने के लिए किसानों को जागरूक होना होगा।

- संतोष कुमार शर्मा, जिला प्रबंधक, एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड