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संतवाणी…जो रहते बुरों के प्रति अच्छे, वही होते हैं मन से सुंदर

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jain saint

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अजमेर.

अच्छों के साथ अच्छे एवं बुरे लोगो के प्रति भी अच्छे रहने वाले क्षमावान होते हैं। यह बात कलापूर्ण सूरि आराधना भवन में निर्मोह सुन्दर ने पर्यूषण पर्व पर प्रवचन के दौरान कही। उन्होंने कहा कि जैन धर्म में सिर्फ महावीर भगवान ही नहीं हुए। उनसे पूर्व पाŸवनाथ, नेमिनाथ, आदिनाथ सहित 23 तीर्थंकर हुए हैं। वेद पुराण इत्यादि में भी आदिनाथ का जिक्र है।

कुछ लोग बुरे के साथ तो बुरे होते हैं मगर अच्छों के साथ भी बुरे हो जाते हैं। यह लोग सड़ी हुई मानसिकता के स्वामी होते हैं। कुछ लोग बुरे के साथ बुरे और अच्छे के साथ अच्छे होते हैं। यह सौदाबाजी की मानसिकता होती है। कई लोग अच्छों के साथ अच्छे एवं बुरे लोगो के प्रति भी क्षमावान होते हैं। यह लोग सुन्दर मानसिकता के स्वामी होते हैं।

प्राचीन काल में खाना घर की महिलाएं बनाती थी। नाचने-गाने के लिए बाहर से महिलाएं आती थी। अब बाहर से आने वाले भोजन बनाते हैं। कई महिलाएं बाहर होने वाले समारोह में नृत्य और अन्य कार्यक्रमों में भाग लेती हैं।

जाते मानसून में यूं मंडराते रहे बादल

बादल शुक्रवार को भी आसमान में मंडराते रहे। छिटपुट बूदांदबांदी को छोडकऱ दिनभर धूप-छांव का दौर चला। झमाझम बरसात की आस पूरी नहीं हुई।
पिछले दो-तीन दिन से भिगोने वाली घटाएं शुक्रवार सुबह आसमान पर मंडराते दिखी। बादलों के छितराने पर धूप-छांव का दौर भी चला। काली घटाएं सिर्फ उमड़ती-घुमड़ती रही। कुछेक जगह मामूली टपका-टपकी हुई। दौराई, तबीजी, रामगंज, चंद्रवरदायी नगर, वैशाली नगर, माकड़वाली रोड, शास्त्री नगर, जयपुर रोड, पंचशील, फायसागर रोड और अन्य इलाकों में बरसात नहीं हुई। तीर्थराज पुष्कर, गगवाना, गेगल और अन्य इलाकों का भी यही हाल रहा। अधिकतम तापमान 31.0 और न्यूनतम 23.5 डिग्री रहा।

अब मानसून के 17 दिन
हर साल मानसून की सक्रियता 1 जून से 30 सितम्बर (122 दिन) तक मानी जाती है। इस लिहाज से 105 दिन बीत चुके हैं। अब मानसून के महज 17 दिन और बचे हैं। इस दौरान जिले की औसत बरसात 550 मिलीमीटर मानी जाती है। बीते छह साल में मानसून की स्थिति इस बार सबसे कमजोर है। जिले में अब तक 351.2 मिलीमीटर बरसात ही हो पाई है। कई तालाबों और बड़े बांधों में पर्याप्त पानी नहीं है।