
ख्वाजा उस्मान हारूनी के उर्स में खुला जन्नती दरवाजा,औपचारिक निभाएंगे सभी रस्में,चुनिंदा लोग होंगे शरीक
ajmer अजमेर. सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के गुरु ख्वाजा उस्मान हारूनी के उर्स के मौके पर दरगाह स्थित जन्नती दरवाजा भी खोला गया है। हालांकि कोरोना माहामारी के चलते उर्स में केवल रस्म अदायगी होगी, जिसमें सिमित संख्या में ही लोग शामिल हो सकेंगे। हजरत ख्वाजा उस्मान हारुनी का दो दिवसीय उर्स मंगलवार से शुरू हो गया।
जायरीन शिरकत नहीं कर सकेंगे
उर्स के मौके पर बुधवार तडक़े दरगाह स्थित जन्नती दरवाजा भी खोला गया है। अंजुमन सचिव वाहिद हुसैन अंगारा शाह ने बताया कि कोरोना माहामारी के कारण यह दूसरा मौका है जब ख्वाजा उस्मान हारूनी के उर्स में जायरीन शिरकत नहीं कर सकेंगे। केवल पासधारी चुनींदा लागों को ही दरगाह में प्रवेश दिया जाएगा। अंजुमन की ओर से होने वाले कार्यक्रम भी नहीं होंगे।
महफिल की जगह केवल फातेहाख्वानी होगी। गौरतलब है कि हारूनी के उर्स में आम दिनों में एक लाख से अधिक जायरीन शिरकत करते हैं। लेकिन पिछले साल की तरह इस बार भी लॉकडाउन के चलते दरगाह में आम जायरीन का प्रवेश बंद है।
महफिल भी औपचारिक
उर्स की धार्मिक रस्मों के तहत मंगलवार रात दरगाह स्थित महफिलखाने में उर्स की महफिल हुई। लेकिन यह औपचारिक रही। इसमें दरगाह दीवान के पुत्र नसीरूद्दीन चिश्ती सहित कुछ लोग शामिल हुए।
छठी की होगी दुआ
ख्वाजा साहब की महाना छठी भी बुधवार को है। दरगाह में बुधवार तडक़े ४ बजे जन्नती दरवाजा खोला गया जो कि दोपहर 2.30 बजे तक खुला रहेगा। वाहिद अंगारा ने बताया कि बुधवार सुबह नौ बजे ख्वाजा साहब की महाना छठी के मौके पर दुआ होगी। दोपहर एक बजे कुल की रस्म के साथ उर्स सम्पन्न होगा।
पांच-छह लोगों को ही अनुमति
पुलिस उप अधीक्षक (दरगाह) रघुवीर प्रसाद शर्मा ने बताया कि कोरोना माहामारी को लेकर सरकार की ओर से जारी गाइड लाइन के अनुसार उर्स में रस्म अदायगी होगी। रस्म के लिए केवल पांच-छह लोगों को ही अनुमति दी गई है।
Published on:
19 May 2021 01:12 am

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