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अपनी विशेषताओं के लिए प्रसिद्ध हैं अजमेर के सिंधी समुदाय के मंदिर

सिंधी समाज ने पिछले 75 वर्षों में अजमेर में सामाजिक और आर्थिक विकास में अग्रणी भूमिका निभाई है। अजमेर में सिंधी समुदाय के कई मंदिर, आश्रम व धर्मशालाएं हैं और झूलेलाल स्वामी ,टेऊंराम की सबसे ऊंची प्रतिमा ।

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अजमेर। सिंधी समाज ने पिछले 75 वर्षों में अजमेर में सामाजिक और आर्थिक विकास में अग्रणी भूमिका निभाई है। अजमेर में सिंधी समुदाय के कई मंदिर, आश्रम व धर्मशालाएं हैं। आदर्श नगर स्थित प्रेमप्रकाश आश्रम में जहां विशाल मूर्तियां हैं वहीं दिल्ली गेट स्थित झूलेलाल धाम में सिंध से लाई ज्योत प्रज्ज्वलित है।

आस्था का केंद्र झूलेलाल धाम
झूलेलाल धाम सिंधी समाज की आस्था का प्रमुख केन्द्र है। प्रभु लौंगानी ने बताया कि सिंध प्रांत के टंडोइलाहयार शहर से बाबा होतचंद लौंगानी ज्योत और झूला लेकर आए थे। दिल्ली गेट के पास मंदिर में इसकी स्थापना की। चेटीचंड पर यहां मेला भरता है। मंदिर से सिंधी संस्कृति के प्रति लोगों को जागरूक किया जाता है। खासतौर पर झूलेलाल के अंतर्ध्यान होने की तिथि पर विशेष पूजा की जाती है। इस दौरान श्रद्धालु 40 दिन के व्रत भी रखते हैं।

दांदूराम ने बनाया जतोई दरबार
जतोई दरबार की स्थापना स्वामी दांदूराम ने की थी। स्वामी दांदूराम बंटवारे के बाद सिंध के जतोई शहर से अजमेर आए थे। नगीना बाग में उन्होंने दरबार की स्थापना की। सेवादार फतनदास ने बताया कि यहां 21 फीट ऊंची झूलेलाल की प्रतिमा भी है।

इसलिए खास है प्रेमप्रकाश आश्रम
आदर्श नगर में संत माधवदास ने प्रेमप्रकाश आश्रम का निर्माण कराया। इस आश्रम को बड़ी-बड़ी मूर्तियों के कारण जाना जाता है। ट्रस्टी नारायणदास रतनानी ने बताया कि स्वामी टेउंराम की विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा यहां स्थापित है। भोलेनाथ की 31 व गणेशजी की 26 फीट ऊंची प्रतिमा भी है। प्रतिमा के नीचे बनाई गुफा में 12 ज्योतिर्लिंग के दर्शन भी होते हैं। आश्रम में स्वामी माधवदास, स्वामी सर्वानंद, संत शांति प्रकाश व हरिदास राम की प्रतिमा है। जिन्हें देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। यहां स्टाफ भी दो-तीन पीढ़ियों से कार्य कर रहे हैं। प्रतिमाओं के साथ यहां ग्रंथों से भी लोगों को रूबरू कराया जाता है। यहां रामायण व प्रेमप्रकाश ग्रंथ भी है।