
55 सालों के इतिहास में पहली बार जेएलएन अस्पताल किसी महामारी के लिए रिजर्व
चन्द्र प्रकाश जोशी
अजमेर. अजमेर संभाग का सबसे बड़ा सरकारी जवाहर लाल नेहरू अस्पताल अपनी स्थापना के 55 सालों के इतिहास में पहली बार वैश्विक बीमारी (महामारी) के लिए रिजर्व कर दिया गया है। किसी एक बीमारी से निपटने के लिए यह पहला मौका है जब सभी मरीजों को अन्यत्र शिफ्ट कर दिया गया है। कोरोना वायरस (कोविड19) की जंग के लिए अस्पताल प्रशासन ने पूरा तैयार कर रखा है।
जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के संबद्ध इस अस्पताल के मुख्य भवन में सैकड़ों मरीजों के लिए वार्ड, ओपीडी आदि की व्यवस्था को बदल दिया गया। विभिन्न विभागों के वार्ड खाली कर दिए गए, आईसीयू, ऑपरेशन थिएटर सभी को खाली कर दिया गया है। यहां करीब 504 बैड कोरोना वायरस संक्रमित मरीजों के लिए आरक्षित किए गए हैं। बैड आदि में भी पर्याप्त दूरी रखी गई है।
कोविड 19 के लिए यह व्यवस्थाएं
-ऑर्थोपेडिक के मेल, फिमेल वार्ड में कोरोना आइसोलेशन वार्ड बनाया।
-ऑर्थोपेडिक की ओपीडी की कोरोना/सर्दी, जुकाम की ओपीडी बनाई।
-नेत्र रोग विभाग, सर्जिकल विभाग के वार्डों, आईसीयू को खाली करवाया।
-मेडिकल आईसीयू को कोरोना आइसीयू के लिए किया तैयार।
-कोरोना मरीज की सर्जरी के लिए अलग से ऑपरेशन थिएटर स्थापित।
-कोरोना पॉजीटिव मरीज, कोरोना संदिग्ध मरीजों के अलग से वार्ड।
-कोरोना पॉजीटिव से नेगेटिव आने वालों का अलग वार्ड।
-कोरोना के लक्षण वाले मरीजों का अलग से वार्ड।
जेएलएन अस्पताल के इतिहास पर एक नजर
-ब्रिटिश काल में विक्टोरिया अस्पताल नाम से स्थापित हुआ।
-1851 में कर्नल डिक्सन ने आदेश जारी कर पहली डिस्पेंसरी प्रारंभ की।
-1895 में डिस्पेंसरी को बड़े जनरल अस्पताल में बदला गया।
-1897 में रानी विक्टोरिया की हीरक जयंती पर इसे क्रमोन्नत किया।
-1928 में वर्तमान जगह इसे न्यू विक्टोरिया नाम दिया गया।
-1965 में जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज की स्थापना हुई।
-1965 में ही न्यू विक्टोरिया अस्पताल का नाम बदल कर इसे जवाहर लाल नेहरू अस्पताल कर दिया गया।
इनका कहना है
जवाहर लाल नेहरू अस्पताल के मुख्य भवन को पूरी तरह कोविड 19 के लिए आरक्षित कर दिया है।
डॉ.अनिल जैन, अधीक्षक, जेएलएन अस्पताल
Published on:
09 Apr 2020 12:03 am
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