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कचौरी-समोसे खाने वालों, हो जाएं सावधान

फेफड़े, आंत व ब्रेस्ट कैंसर का खतरा सेहत से खिलवाड : तेज आंच पर कई बार गर्म कर रहे खाद्य तेल

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अजमेर

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Anil Kailay

Jan 07, 2023

कचौरी-समोसे खाने वालों, हो जाएं सावधान

कचौरी-समोसे खाने वालों, हो जाएं सावधान

अनिल कैले

अजमेर। आप कढ़ी कचौरी या समोसे खाते हैं तो आपको सावधान हो जाना चाहिए। देखने में आया है कि खाद्य तेल का उपयोग करते समय लापरवाही बरती जा रही है। तेज आंच पर तेल कई बार गर्म करके समोचे और कचोरी तले जा रहे हैं। बार बार तेल गर्म करने से तेल में रासायनिक परिवर्तन होता है। यह डीएनए को नुकसान पहुंचाने और उसमें परिवर्तन लाने का कारण बनता है। तेल के धुएं में अमोनियम नाइट्रेट सहित कई हानिकारक गैस होती हैं, जो सेहत को नुकसान पहुंचा सकती हैं।

प्रतिदिन 2 लाख कचोरी की खपत

करीब साढ़े छह लाख की आबादी वाले अजमेर शहर में खानपान बेचने के लिए 12 हजार से अधिक लोगों ने पंजीकरण कराया है। ढाई हजार से अधिक को लाइसेंस जारी किए गए हैं। इनमें 600 से अधिक लाइसेंस समोसे और कचौरी बनाने के लिए दिए गए हैं। शहर में प्रतिदिन दो लाख से अधिक कचोरी और 35 हजार लीटर से अधिक कढ़ी की खपत होती है।

लापरवाही चरम पर, जिम्मेदार मौन

चुनिंदा दुकानदारों को छोड़ दिया जाए तो इस व्यवसाय से जुड़े लोग धड़ल्ले से एक ही तेल को बार बार गर्म करके उसमें से कचोरी और समोसे तल रहे हैं। खाद्य विशेषज्ञों की मानें तो तेल को दो से ज्यादा बार तेज आंच में गर्म करने पर वह सेहत के लिए नुकसानदायक हो जाता है। तेल में मौजूद सैचुरेटेड फैट लिवर पर जमा हो जाता है, जिससे फाइब्रोसिस और सिरोसिस जैसी बीमारी होने की आशंका बनी रहती है। कायदे से तो दो बार से अधिक गर्म किए हुए तेल को इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। उसे निकालकर अलग रख देना चाहिए। यह तेल बायोडीजल बनाने में काम आता है। खाद्य सुरक्षा विभाग को भी ऐसा तेल जब्त कर लेना चाहिए। अजमेर में तो आज तक खराब तेल की जब्ती की कार्रवाई नही हुई है।

तेल बदलते नहीं हैं

अच्छी गुणवत्ता का तेल इस्तेमाल करते हैं। एक बार कड़ाही में 15 लीटर तेल डालते हैं। इसमें तीन चार बार में 450 कचोरी तली जाती है। जले हुए तेल को बदलते नहीं हैं। उसी तेल में नया तेल मिला देते हैं।

- राम सिंह (परिवर्तित नाम),

कचोरी प्रतिष्ठान, नया बाजार

यूज्ड तेल का नमूना नहीं लिया

तेल के सैंपल पूर्व में लिए गए हैं लेकिन कचौरी समोसा बनाने के बाद यूज्ड तेल का एक भी सैंपल नहीं लिया गया है।

सुशील कुमार चोटवानी, खाद्य सुरक्षा अधिकारी, अजमेर

घर पर बना हुआ खाएं

जले हुए तेल (यूज्ड) की शुद्धता खराब हो जाती है। हानिकारक लवण उत्पन्न हो जाते हैं। जले हुए तेल में बार बार तला हुआ खाने व सूंघने से शरीर को नुकसान हो जाता है। जीन में खराबी हो जाती है। इससे कैंसर भी हो सकता है। आंत्र संबंधी बीमारियों में पेट में जलन, पेट में छाले होना, खट्टी डकार आना शामिल है। कॉलेस्ट्रॉल बढ़ने से मोटापा, हार्ट की बीमारी का भी खतरा बढ़ता है। यूज्ड तेल बीमारी पैदा करने में मदद करता है। इसमें और रिसर्च होनी चाहिए। शुद्ध तेल में पकाई सामग्री खाएं। घर पर बना हुआ खाएं।

डॉ. अनिल सामरिया, वरिष्ठ फिजिशियन जेएलएन अस्पताल, अजमेर