scriptKhal's second goods train left for Bangladesh in three months | तीन माह में ही खल की दूसरी मालगाड़ी बांग्लादेश रवाना | Patrika News

तीन माह में ही खल की दूसरी मालगाड़ी बांग्लादेश रवाना

रेलवे को 55 लाख की आय, 11 मालगाड़ी और जाएंगी बांग्लादेश

करीब तीन माह के अंदर ही धौलपुर रेलवे स्टेशन से बांग्लादेश के लिए दूसरी मालगाड़ी रविवार को रवाना हुई। इससे पूर्व आगरा मण्डल के इतिहास में पहली बार 15 अगस्त को बांग्लादेश के लिए मालगाड़ी भेजी गई थी।

 

अजमेर

Published: November 08, 2021 01:41:08 am

धौलपुर. करीब तीन माह के अंदर ही धौलपुर रेलवे स्टेशन से बांग्लादेश के लिए दूसरी मालगाड़ी रविवार को रवाना हुई। इससे पूर्व आगरा मण्डल के इतिहास में पहली बार 15 अगस्त को बांग्लादेश के लिए मालगाड़ी भेजी गई थी। यह मालगाड़ी करीब तीन दिन में बांग्लादेश के रोहनपुर में पहुंच जाएगी। वहीं अभी 11 मालगाड़ी और बांग्लादेश जाने के लिए पाइप लाइन में हैं। जिनकी व्यवस्था में रेलवे के अधिकारी जुटे हुए हैं। रेलवे को इस मालगाड़ी से 55 लाख रुपए की आय हुई है, जबकि पहली मालगाड़ी भेजने पर रेलवे को करीब 58 लाख रुपए की आय हुई थी। धौलपुर रेलवे स्टेशन के डीसीआई आरसी मीणा ने बताया कि आगरा डिवीजन वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक अमन वर्मा के प्रयासों से आरके इंटरप्राइजेज कोलकाता के चेयरमैन रूपचंद प्रसाद ने रविवार को धौलपुर स्टेशन से 42 बीसीएन वैगन सरसों की खल का लदान बांग्लादेश के लिए किया। जिससे धौलपुर रेलवे स्टेशन आगरा मंडल को लगभग 55 लाख रुपए की आय हुई है। अभी धौलपुर रेलवे स्टेशन से बांग्लादेश के लिए 11 रैक की मांग वीके उद्योग लिमिटेड कोलकाता और आरके एंटरप्राइजेज कोलकाता की बनी हुई है।
सेंट्रल रेलवे ने चलाई 1,415 मालगाड़ी
सेंट्रल रेलवे ने चलाई 1,415 मालगाड़ी
क्षेत्र में भारी मात्रा में निकलती है खल

बांग्लादेश में सरसों की खल की डिमाण्ड होने के कारण कोलकाता के व्यापारियों का इसके प्रति रुझान बना हुआ है। वहीं धौलपुर, मुरैना, भरतपुर आदि क्षेत्रों में सरसों तेल निकालने के लिए बड़ी संख्या में मिल स्थापित हैं। जहां से खल बड़ी मात्रा में निकलती हैं। यहां से खल को एकत्रित कर बांग्लादेश भेजने के लिए धौलपुर रेलवे स्टेशन मुफीद है। धौलपुर रेलवे स्टेशन आसपास क्षेत्र के बीच में पड़ता है। इस कारण व्यापारियों को यहां के रलवे स्टेशन से मालगाड़ी भेजना सस्ता पड़ता है।
यात्री भार कम होने की हो रही भरपाई

रेलवे सूत्रों के अनुसार कोरोना काल में यात्री भार से रेलवे की आय शून्य तक पहुंच गई थी। इसे रेलवे को राजस्व को हानि झेलनी पड़ी थी। लेकिन कोरोना काल के बाद अगस्त माह में आगरा मण्डल ने इतिहास रचते हुए मालगाड़ी की रैक का लदान किया और करीब 58 लाख रुपए की आय हुई तो रेलवे अधिकारियों की सांस में सांस आई। वहीं अब दूसरी मालगाड़ी रवाना होने से रेलवे को यात्री भार से हुई हानि की भरपाई की जा रही है। वहीं, अभी 11 मालगाड़ी और जाने की संभावनाओं के चलते रेलवे को अतिरिक्त आय भी होगी।

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