
ब्यावर में बादशाह की पारम्परि सवारी धूमधाम से निकाली गई। बादशाह को अपने बीच पाकर प्रजा झूम उठी। आओ बादशाह, खेलो बादशाह की स्वर लहरियों के बीच बादशाहर अकबर ने लोगों के साथ होली खेली।
सदियों पुरानी परम्परानुसार गुलाल से भरे ट्रक में बादशाह अकबर सवार हुए। इनके आगे बीरबल नृत्य करते हुए चले। बादशाह अकबर ने कागज में गुलाल (खर्ची) भरकर लोगों की तरफ उछाली। लोगों ने भी बादशाह पर गुलाल फैंकी।
समूचे बाजार में सड़कों, दुकानों और घरों पर गुलाल ही गुलाल नजर आया। लोगों खर्ची को शुभ मानकर सुरक्षित रखा। बादशाह के साथ होली खेलने के लिए आसपास के ग्रामीण इलाकों से भी लोग पहुंचे। सवारी देर शाम तक उपखंड कार्यालय पहुंची। यहां कुछ पलों के लिए बादशाह अकबर और बीरबल को शहर की प्रतीकात्मक रूप से कमान सौंपी गई। अकबर ने कुछ फरमान भी जारी किए।
नसीराबाद में निकली सवारी
नसीराबाद में भी धूलंडी के मौके पर मुख्य बाजार से बादशाह की सवारी निकाली गई। हिंदू क्रांति सेना के नेतृत्व में निकाली गई सवारी का जगह-जगह स्वागत हुआ। युवाओं ने डीजे की धुनों पर नाचते-गाते बादशाह संग होली। बादशाह ने भी गुलाल उड़ाकर होली का लुत्फ उठाया। समूचा शहर गुलाल से अटा नजर आया। इस परम्परा में शामिल होने के लिए सुदूर क्षेत्रों से लोग नसीराबाद पहुंचे।
भिनाय में कोड़ा मार होली
भिनाय में कोड़ा मार होली खेली गई। यहां कावडि़ए और चौक दल के बीच जमकर मुकाबला हुआ। पानी में रखे रस्सों के कोड़े बनाकर लोगों ने एकदूसरे के सोटे लगाए। इस दौरान भैरूंजी मंदिर तक पहुंचने तक दोनों दलों को जबरदस्त जोर आया। कोड़े की मार खाने से कई लोग हल्के चोटिल हुए, लेकिन होली का प्रसाद पाने की खुशी नजर आई।
पुष्कर में खेली कपड़ा फाड़ होली
पुष्कर में विदेशियों और देशी लोगों ने कपड़ा फाड़ होली खेली। वराह चौक पर सुबह से ही होली खेलने का सिलसिला शुरू हो गया। यह दोपहर तक जारी रहा। कपड़े फाड़कर तार पर लटकाने के लिए विदेशियों में होड़ रही। स्थानीय लोगों ने भी उनके साथ जमकर होली खेली।
Published on:
03 Mar 2018 07:00 pm
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