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मजदूर दिवस विशेष : सर्दी हो या गर्मी पसीना बहाने को मजबूर हैं ये मजदूर

प्रतिवर्ष की तरह इस बार भी श्रमिक दिवस मनाया जाएगा।

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Labour day special: labours hard work is appreciable in world

अजमेर . प्रतिवर्ष की तरह इस बार भी श्रमिक दिवस मनाया जाएगा। सरकारी स्तर पर कुछ कार्यक्रम आयोजित कर औपचारिकता निभा ली जाएगी वहीं कुछ श्रमिक संगठन पदाधिकारी गोष्ठी आयोजित कर श्रमिकों के कल्याण व उनकी समस्याओं पर चर्चा कर ली जाएगी लेकिन वास्तव में श्रमिकों के कल्याण के लिए बनी योजनाओं का लाभ उन तक नहीं पहुंच पा रहा है।

इसकी वजह श्रमिकों को संगठित नहीं हो पाना है। जिन श्रमिकों का पंजीयन श्रम विभाग में किया गया है केवल वही सरकारी योजनाओं से लाभ प्राप्त करने के हकदार हैं। इयही वजह है रोजाना मजदूरी का आंकड़ा 700 रुपए तक पहुंच जाने के बावजूद उनका जीवन स्तर में सुधार नहीं हो सका है।

सरकार अब तक करीब 40 करोड़ रुपए श्रमिकों के कल्याण, हादसों दुर्घटना में मुआवजे व उनके बच्चों के शिक्षण वजीफे आदि के मद में व्यय कर चुकी है इसके बावजूद श्रमिकों के हालात जस के तस हैं। उनके जीवन स्तर नहीं बढ़ा है। आज भी शहर के विभिन्न हिस्सों में श्रमिकों की मंडिया लगती हैं इनमें से 30 से 40 प्रतिशत श्रमिकों को खुली मजदूरी में काम मिल जाता है शेष को खाली घर लौटना पड़ता है। इसकी प्रमुख वजह ठेकेदारों की मनमानी तथा अन्य प्रांतों उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश के श्रमिकों का यहां डेरा जमाना है। ठेकेदार इन्हें पूरे माह स्थायी मजदूरी देने के एवज में कम मजदूरी पर काम पर रखता है। इसका लाभ ठेकेदार को मिलता है लेकिन मजदूरों की माली हालत इतनी मजदूरी बढऩे के बावजूद भी बेहतर नहीं हो सकी है।