17 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

PATRIKA EVENT : अब अबला नहीं सबला है नारी, महिलाओं ने पत्रिका से बातचित में बताया बालिका शिक्षा की अहमियत को

नारी अब अबला नहीं सबला है। एक शिक्षित नारी उन्नत समाज का आधार है। नारी को अपने अधिकारों के प्रति जागरुक करने के लिए उसका शिक्षित होना अनिवार्य है।

2 min read
Google source verification
ladies share their views with patrika on womans day

अजमेर . नारी अब अबला नहीं सबला है। एक शिक्षित नारी उन्नत समाज का आधार है। नारी को अपने अधिकारों के प्रति जागरुक करने के लिए उसका शिक्षित होना अनिवार्य है। नारी सम्मान, शिक्षा के लिए उसे पुरुषों से कम कभी नहीं आंकना चाहिए। एक नारी दो घरों के विकास का आधार होती है। परिवार में वह अपने घर की रौनक होती है तो ससुराल में वह शान होती है। नारी को अपने अधिकारों के लिए अब भी संघर्ष करना पड़ता है उसे अपने हक या अधिकारों को छीनने की नौबत आती है जबकि आज नारी किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं है।मानव अधिकारों के लिए संगठन कार्य कर रहे हैं लेकिन महिला अधिकारों को लेकर भी उतनी सजगता जरुरी है।

राजस्थान पत्रिका की ओर से रामगंज में बुधवार को टॉक शो का आयोजन किया गया। टॉक शो में राजनीतिक, सामाजिक क्षेत्र से जुड़ी महिलाओं ने बेबाकी से अपने विचार रखे। टॉक -शो में महिलाओं का कहना था कि शिक्षा के क्षेत्र में महिलाएं आगे जरुर आई हैं लेकिन अब सामाजिक दृष्टिगत उन्हें अपने हकों के लिए अब भी लड़ाई करनी पड़ती है। अत्याचार सहने की एक हद होती है। महिलाएं दफ्तरों में काम करने लगी है, हवाई जहाज तक उड़ाने लगी हैं अब किसी प्रकार का अत्याचार सहने की जरुरत नहीं है। यही छोटी छोटी कमियां बाद में बड़ी वारदात का रूप ले लेती है।

हरदीप कौर का कहना है कि महिलाओं की शिक्षा को बढ़ावा देते हुए बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ का संदेश अब भी समसामयिक है। टॉक शो में मधुबाला मेहरा, हरदीप कौर, रक्षा मित्तल, पूजा, नंदिनी व दीक्षा चतुर्वेदी ने भी विचार रखे।


'प्रतिभा की कमी नहीं, अवसर की दरकारÓमहिलाओं में प्रतिभा की कमी नहीं है लेकिन उन्हें अवसर नहीं दिए जाते। आज महिलाएं अंतरिक्ष तक पहुंच गई। चिकित्सा, शिक्षा, पुलिस, प्रशासन, बैंकिंग सैक्टर आदि में महिलाएं पुरुषों से कई कदम आगे हैं लेकिन उन्हें अवसर नहीं दिए जाते। नीतिगत फैसलों के बारे में उसने मशविरा नहीं लिया जाता।

-रेणु मेघवंशी
महिलाएं अपने हक मांगे यदि उन्हें तवज्जो नहीं मिलती तो उन्हें अपने हकों को छीनने से भी गुरेज नहीं करना चाहिए। आखिर कब तक वह पुरुषों के भरोसे रहेंगी। शिक्षा व ज्ञान की कोई कमी नहीं है इसके बावजूद उसे पुरुष की ओर मुंह किए रहना पड़ता है। यह अनुचित है। फिर कैसे कह सकते हैं नारी पुरुष समान है।

-शहनाज खान
महिलाओं को शिक्षित करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक मेहनत की जरुरत है। आज भी गांवों में लड़की को शिक्षा के लिए दूर भेजने में संकोच किया जाता है। उसे दोयम दर्जा देते हुए लड़कों को आगे रखा जाता है यहीं से नारी की नींव कमजोर हो जाती है।

-प्रमिला चतुर्वेदी