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विद्यालयों पर लाखों का कर्जा, न खाने का, न पकाने का मिल रहा पैसा

- उधारी से पक रहा पोषाहार, संस्था प्रधानों की नहीं हो रही सुनवाई - मानदेय को तरस रहे ढाई हजार कुक कम हेल्पर जिले में योजना के तहत विद्यालय - 1172 कुल नामांकन- 176776 कक्षा पहली से पांचवीं तक - 115135 कक्षा छठी से आठवीं तक - 61641 4.97 रुपए सामग्री की राशि प्रति विद्यार्थी पांचवीं तक 7.45 रुपए सामग्री की राशि प्रति विद्यार्थी आठवीं तक

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अजमेर

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Dilip Sharma

Sep 22, 2022

विद्यालयों पर लाखों का कर्जा, न खाने का, न पकाने का मिल रहा पैसा

विद्यालयों पर लाखों का कर्जा, न खाने का, न पकाने का मिल रहा पैसा

धौलपुर. सरकारी स्कूलों में चल रही विद्यार्थियों की पोषाहार योजना उधारी की भेंट चढ़ गई है। स्कूलों को न सामग्री की राशि मिल रही और ना ही रसोइयों को मानदेय दिया जा रहा है। करीब छह माह से सरकार ने स्कूलों को मिड-डे मील की सामग्री का बजट नहीं नहीं दिया है। धौलपुर जिले ही नहीं प्रदेश में यही स्थिति बनी हुई है। ऐसे में स्कूल का पोषहार शिक्षक उधारी में सामग्री लाने को मजबूर हैं। अकेले धौलपुर जिले में कुकिंग कन्वर्जन व कुक कम हेल्पर के लाखों रुपए बकाया चल रहा है। इसमें कुकिंग कन्वर्जन का भी लाखों रुपए बकाया है, जिसको लेकर शिक्षक असमंजस में बना हुए हैं कि आखिर पैसा आएगा तो कब। कुक कम हेल्पर को भी मानदेय नहीं मिलने से घर में आर्थिक किल्लत की वजह से चूल्हा जलाना मुश्किल हो गया है। हालांकि, हाल ही में बसेड़ी ब्लॉक के कुक कम हेल्पर का सितंबर तक के मानदेय का भुगतान कर दिया गया है। वहीं, और राजाखेड़ा ब्लॉक में जुलाई तक का भुगतान किया है। शेष ब्लॉक में फिलहाल भुगतान नहीं हो पाया है। बता दें, राष्ट्रीय पोषाहार कार्यक्रम का संचालन कक्षा पहली से आठवीं के बालक-बालिकाओं के लिए किया जाता है। कोरोना संक्रमण काल में विद्यार्थियों को खाद्यान्न के पैकेट दिए थे। विद्यालय नियमित खुलने के साथ ही योजना के अन्तर्गत पोषाहार विद्यालयों में देना आरंभ किया, लेकिन समय पर राशि का भुगतान नहीं होने से अब संकट बढ़ गया है और योजना का क्रियान्वयन उधारी के भरोसे हो रहा है। जिले के अधिकतर स्कूलों में अप्रेल से ही बकाया चल रहा बताया है।

यह हैं प्रावधान

योजना के अन्तर्गत गेहूं और चावल विभाग की ओर से दिया जाता है। सामग्री की राशि से दाल, सब्जी, तेल, मसाले आदि बाजार से खरीदे जाते हैं। इसके अतिरिक्त प्रत्येक गुरुवार को फल देने का भी प्रावधान है।

रसोइयों को भी भुगतान का इंतजार

शिक्षा विभागीय जानकारी के अनुसार योजना के अन्तर्गत विद्यालयों में पोषाहार पकाने वाले रसोइयों को भी मानदेय का तीन माह से भुगतान नहीं हुआ है। जिले में 2432 कुक कम हेल्पर हैं, जिन्हें प्रतिमाह 1742 रुपए मानदेय देने का प्रावधान हैं, किंतु वे भी भुगतान नहीं होने से आर्थिक तंगी झेल रहे हैं।

इनका कहना है

स्कूलों में पोषाहार का पैसा एंडवास डलना चाहिए। छह-छह माह तक पैसा नहीं डलने से दुकानदारों में शिक्षकों के प्रति गलत अवधारणा पैदा होती है। सामग्री की राशि नहीं मिलना हर बार की समस्या है। इससे पोषाहार का प्रभार संभाल रहे शिक्षकों को सामग्री लाने के स्वयं राशि खर्च करनी पड़ रही है।

- राजेश शर्मा, जिलाध्यक्ष, पंचायतीराज कर्मचारी संघ

अभी तक उपलब्ध राशि के हिसाब से बसेड़ी व सरमथुरा में सितंबर तक की राशि का भुगतान कर दिया गया है। राजाखेड़ा में भी जुलाई तक का भुगतान किया गया है। राशि आते ही शेष ब्लॉक में भी भुगतान कर दिया जाएगा। सभी खाते सिंगल नोडल एजेंसी पोर्टल पर भी अपडेट कर दिए गए हैं।

- केदार गिरि गोस्वामी, जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक, धौलपुर