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RBSE : बोर्ड की लाचारी लाखों परीक्षार्थियों पर पड़ न जाए भारी

लापरवाह परीक्षकों पर कार्रवाई से बचता है माशिबो, लेना पड़ता है उन्हीं से काम, वैकल्पिक इंतजामों में नाकाम

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अजमेर

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Preeti Bhatt

Mar 16, 2020

बोर्ड की लाचारी लाखों परीक्षार्थियों पर भारी

बोर्ड की लाचारी लाखों परीक्षार्थियों पर भारी

सुरेश लालवानी.

अजमेर.राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के लाखों परीक्षार्थियों की सालभर की कड़ी मेहनत पर बोर्ड का रवैया खुद के इंतजामों को दुरुस्त नहीं कर परीक्षकों के आगे लाचार बने रहने के चलते इस साल भी पानी फेर सकता है। पिछले कई वर्षों से कॉपियां जांचने में लापरवाही के हजारों मामले लगातार सामने आने के बावजूद जिम्मेदार परीक्षकों के विरुद्ध न तो कोई ठोस कार्रवाई की जाती है एवं ना ही अन्य कोई वैकल्पिक इंतजाम करने की दिशा में कोई कदम उठाए गए हैं। इससे इस मर्तबा भी बोर्ड परीक्षार्थियों सहित उनके अभिभावकों में उत्तरपुस्तिकाओं के सटीक मूल्यांकन को लेकर शंकाएं पैदा हो गई हैं।


परीक्षकों के आगे बेबस रहता है बोर्ड

मौजूदा व्यवस्था के तहत बोर्ड प्रशासन परीक्षकों के सामने लाचार बना रहता है। दरअसल बोर्ड को प्रति वर्ष लगभग एक करोड़ 20 लाख उत्तरपुस्तिकाएं जंचवानी होती हैं। इसके लिए 25 हजार परीक्षकों की जरूरत रहती है। परिणाम आने के बाद असंतुष्ट विद्यार्थियों की ओर से पुनर्मूल्यांकन करवाए जाने पर हजारों परीक्षार्थियों का रिजल्ट बदल जाता है। कॉपी जांचने में अधिक गलती करने वाले संबंधित परीक्षक को डी-बार किया जा सकता है। इस कार्रवाई से बचने के लिए परीक्षक बोर्ड की उत्तरपुस्तिकाएं जांचने से आनाकानी कर देते हैं। यह जानना भी जरूरी है कि बोर्ड किसी शिक्षक को कॉपियां जांचने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। ऐसी स्थिति बनती है तो समय पर परिणाम निकालना संभव नहीं हो पाएगा। हालांकि डी-बार करने की कार्रवाई भी असर नहीं दिखा पाती।


एक से 45 अंकों की बढ़ोतरी

संवीक्षा के कई मामलों में विद्यार्थियों के 1 से 45 अंकों तक की बढ़ोतरी हो जाती है, जिससे परीक्षकों के उत्तरपुस्तिकाएं जांचने में लापरवाही करना स्वत:सिद्ध है। लेकिन इसके बावजूद बोर्ड ने इस ओर अन्य कोई वैकल्पिक इंतजाम की कभी कोई कवायद नहीं की। इससे उसे परीक्षकों पर ही निर्भर और उन्हीं के आगे बेबस होना पड़ता है।

संवीक्षा आंकड़े जारी करने से बचता है बोर्ड
परिणाम जारी होने के बाद राज्य के लगभग डेढ़ से दो लाख विद्यार्थी अपनी उत्तरपुस्तिकाओं की री-टोटलिंग के लिए आवेदन करते हैं। इनमें से लगभग 15 से 25 हजार विद्यार्थियों के अंक बढ़ जाते हैं। लेकिन उनका परिणाम आने तक आधा शैक्षणिक सत्र बीत चुका होता है। लिहाजा परिणाम बदलने के बावजूद उनका साल बर्बाद हो जाता है। खास बात यह है कि संवीक्षा आवेदन और परिणाम बदलने के आंकड़े शिक्षा बोर्ड अधिकृत रूप से जारी नहीं करता। इससे भी बोर्ड प्रशासन की नीयत पर सवाल उठते हैं।

‘होगी पुख्ता कार्रवाई’

लापरवाह परीक्षकों के खिलाफ महज डी-बार की कार्रवाई काफी नहीं है। इस संबंध में कमेटी का गठन कर सुझाव मांगे जाएंगे। परीक्षकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी होनी चाहिए। इस संबंध में पुख्ता कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ डी. पी. जारोली, अध्यक्ष माशिबो राजस्थान