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ये टीचर्स कभी नहीं मिले स्टूडेंट्स से, फिर भी कॉलेज में चलता है इनका नाम

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law college ajmer

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रक्तिम तिवारी/अजमेर.

जहां प्रदेश के कई लॉ कॉलेज संसाधनों और शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। वहीं लॉ कॉलेज अजमेर के दो शिक्षक डेप्यूटेशन पर जयपुर में तैनात हैं। वे इस कॉलेज में सिर्फ कागजों में ही पदस्थापित हैं। ताकि बार बार कौंसिल ऑफ इंडिया को शिक्षकों की कमी नजर नहीं आए।

प्रदेश वर्ष 2005-06 में 15 लॉ कॉलेज स्थापित हुए। इनमें अजमेर, भीलवाड़ा, सीकर, नागौर, सिरोही, बूंदी, कोटा, झालावाड़ और अन्य कॉलेज शामिल हैं। शुरुआत में लॉ कॉलेजों में विधि शिक्षकों की स्थिति ठीक रही, लेकिन लगातार सेेवानिवृत्तियों के चलते स्थिति बिगड़ती चली गई। इनमें अजमेर का लॉ कॉलेज भी शामिल था। यहां पिछले साल जुलाई तक महज चार शिक्षक ही कार्यरत थे। राजस्थान लोक सेवा आयोग ने विधि शिक्षकों के साक्षात्कार कराए। इसके बाद अगस्त में कॉलेज को तीन नए शिक्षक मिले।

दो शिक्षक डेप्यूटेशन पर
लॉ कॉलेज में प्राचार्य सहित नौ शिक्षक कार्यरत हैं। इनमें से छह शिक्षक तो दिखाई देते हैं, लेकिन दो शिक्षक डेप्यूटेशन पर जयपुर में तैनात हैं। इनमें डॉ. सुनील कुमार और अल्का भाटिया शामिल हैं। डॉ. कुमार प्रतिमाह वेतन-भत्ते लॉ कॉलेज से ले रहे हैं। जबकि डॉ. भाटिया ने यहां ज्वाइन ही नहीं किया है। उनका नाम सिर्फ कागजों में लिखा है।

ताकि बीसीआई को नहीं लगे कमी....

14 साल से बार कौंसिल ऑफ इंडिया से कॉलेज को स्थाई मान्यता नहीं पाई है। इसके पीछे शिक्षकों की कमी सबसे बड़ा कारण रही है। यहां शिक्षकों की संख्या पूरी मिले, इसके चलते सरकार और कॉलेज शिक्षा निदेशालय ने कागजों में दस शिक्षकों की नियुक्ति बताई हुई है। वास्तव में सिर्फ सात शिक्षक ही कक्षाएं ले रहे हैं।

ये लॉ कॉलेज की परेशानियां.....
-बीते 14 साल से बीसीआई से नहीं मिली स्थाई सम्बद्धता

-प्रतिवर्ष प्रथम वर्ष के दाखिलों में होता है विलम्ब
-वरिष्ठ वकीलों की लेनी पड़ती है सेवाएं

-विधि शिक्षा का पृथक कैडर नहीं होने से स्थाई प्राचार्य नहीं

शिक्षकों के डेप्यूटेशन के लिए सरकार और निदेशालय ही अधिकृत हैं। इस बारे में उच्चाधिकारी ही बता सकते हैं।

डी. के. सिंह, कार्यवाहक प्राचार्य लॉ कॉलेज