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13 साल से पैरों पर नहीं हो पाया खड़ा, किसी डॉक्टर से पास नहीं ईलाज

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अजमेर

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raktim tiwari

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Updated: 25 Nov 2018, 2:28 PM IST

law college ajmer

law college ajmer

अजमेर.

यूजीसी में पंजीकरण और राष्ट्रीय प्रत्याययन एवं मूल्यांकन परिषद (नैक) की रैंकिंग नहीं होने से लॉ कॉलेज को नुकसान हो रहा है। अव्वल तो कॉलेज राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा शिक्षा अभियान के बजट से महरूम है। तिस पर कोई अनुदान भी नहीं मिल रहा। उधर कॉलेज के यूजीसी में पंजीयन कराने में महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय रोड़े अटका रहा है।

वर्ष 2005-06 में लॉ कॉलेज स्थापित हुआ। कॉलेज को अब तक बार कौंसिल ऑफ इंडिया से स्थाई मान्यता नहीं मिल पाई है। यूजीसी के नियम 12 (बी) और 2 एफ में पंजीकृत ही नहीं है। इसके चलते कोई कॉलेज राष्ट्रीय प्रत्यायन एवं मूल्यांकन परिषद (नैक) से ग्रेडिंग नहीं ले पाया है। साथ ही सरकार से भी कोई अनुदान नहीं मिल रहा है।

यह है नियम....

यूजीसी के नियम 12 (बी) और 2 एफ के तहत सभी कॉलेज और विश्वविद्यालयों को पंजीकृत किया जाता है। यह पंजीयन संस्थाओं में शैक्षिक विभाग, शिक्षकों और स्टाफ की संख्या, भवन, संसाधन, सह शैक्षिक गतिविधियों और अन्य आधार पर होता है। पंजीकृत संस्थाओं को राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान और यूजीसी से विकास कार्यों, शैक्षिक कॉन्फे्रंस, कार्यशाला, भवन निर्माण के लिए बजट मिलता है। पंजीयन नहीं होने से कॉलेज को नुकसान हो रहा है।

विश्वविद्यालय अटका रहा रोड़े

यूजीसी में पंजीयन को लेकर महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय रोड़े अटका रहा है। नियमानुसार लॉ कॉलेज के पंजीयन के लिए विश्वविद्यालय को एक पत्र यूजीसी को फॉरवर्ड करना है। लेकिन बार कौंसिल ऑफ इंडिया से मान्यता नहीं मिलने का तर्क देकर विश्वविद्यालय बेवजह अड़ंगे लगाए बैठा है। इसके चलते लॉ कॉलेज में विकास कार्य ठप है।

भवन का नहीं हो रहा विस्तार

बीसीआई के नियमानुसार लॉ कॉलेज में विद्यार्थियों के लिए 12 कमरे, हाइटेक लाइब्रेरी, कम्प्यूटर लेब, सेमिनार हॉल, कैंटीन और अन्य सुविधाएं होने चाहिए। लेकिन कॉलेज महज 8 कमरों में संचालित है। हाइटेक कम्प्यूटर लेब नहीं है। लाइब्रेरी में प्रतिवर्ष 50 हजार की किताबें खरीदने का प्रावधान है, लेकिन जगह कम होने से कॉलेज परेशान है।


यूजीसी के 12 बी-2एफ में पंजीकरण होने के बाद ही ग्रेडिंग के लिए आवेदन संभव है। हमने विश्वविद्यालय को भी पत्र लिखा है। फिलहाल मामला आगे नहीं बढ़ पायाहै। मामले में सरकार, यूजीसी और बीसीआई ही फैसला लेने के लिए अधिकृत हैं। डॉ. डी. के. सिंह प्राचार्य लॉ कॉलेज