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लीड…लॉटरी के पत्ते खुलेंगे तो बदलेगी सियासी बिसात

अजमेर

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Newsdesk

Aug 11, 2026

Rajasthan

- इस बार आरक्षण की तस्वीर पर टिकी दावेदारों की नजर

गंगापुरसिटी. निकाय एवं पंचायत चुनाव की आहट के साथ ही शहर से लेकर गांवों तक राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवार मतदाताओं के बीच सक्रिय होने लगे हैं, लेकिन आरक्षण की तस्वीर साफ नहीं होने से कई दावेदारों की रणनीति फिलहाल लॉटरी पर अटकी हुई है। राज्य सरकार की ओर से निकाय प्रमुखों तथा जिला कलक्टर की ओर से वार्ड पार्षदों के लिए जल्द ही लॉटरी निकाले जाने की संभावना को देखते हुए उम्मीदवारों में कशमकश का दौर चल रहा है।
लॉटरी के बाद यह तय होगा कि किस वार्ड में कौन सा वर्ग चुनाव मैदान में उतर सकेगा। ऐसे में कई दावेदार अपने पसंदीदा वार्ड में आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार कर रहे हैं। कुछ उम्मीदवारों ने तो संभावित आरक्षण के हिसाब से वैकल्पिक वार्डों पर भी नजर रखना शुरू कर दिया है। वहीं राजनीतिक दलों के स्थानीय पदाधिकारी भी संभावित दावेदारों की सूची और वार्डों की स्थिति को लेकर अंदरखाने मंथन कर रहे हैं।

पांच कार्यकाल से सामान्य वर्ग का दबदबा
गंगापुरसिटी नगर निकाय की राजनीति पर नजर डालें तो पिछले पांच कार्यकाल में सामान्य वर्ग पुरुष अथवा महिला का ही दबदबा रहा है। ऐसे में इस बार आरक्षण की लॉटरी में यदि किसी आरक्षित वर्ग के लिए सीट तय होती है तो कई पुराने राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। वहीं सामान्य वर्ग की सीटें बरकरार रहने की स्थिति में पहले से तैयारी कर रहे दावेदारों को राहत मिल सकती है।

लॉटरी के बाद खुलेंगे सियासी पत्ते

निकाय चुनाव को लेकर कई संभावित उम्मीदवार लंबे समय से वार्डों में सक्रिय हैं। कोई सामाजिक कार्यक्रमों के जरिए लोगों से जुड़ रहा है तो कोई व्यक्तिगत संपर्क बढ़ाकर अपनी जमीन मजबूत करने में जुटा है। हालांकि अधिकांश दावेदार अभी खुलकर चुनावी मैदान में उतरने से बच रहे हैं। उन्हें डर है कि जिस वार्ड में उन्होंने मेहनत शुरू की है, यदि वही वार्ड आरक्षित हो गया तो पूरी रणनीति बदलनी पड़ सकती है।
लॉटरी निकलने के बाद राजनीतिक दलों के टिकट वितरण से लेकर उम्मीदवारों की सक्रियता तक में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। कई दावेदार नए वार्ड की तलाश करेंगे, जबकि कुछ संभावित प्रत्याशी अपने परिवार के किसी सदस्य को चुनाव मैदान में उतारने की रणनीति बना सकते हैं। ऐसे में फिलहाल शहर की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि लॉटरी किसके लिए खोलेगी चुनाव का रास्ता और किसके लिए बंद करेगी उम्मीदों का दरवाजा।