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सात साल से पानी भराव को तरसा नारायण सागर बांध

बांध का जलग्रहण क्षेत्र खाली रहने से गिरा भूजल स्तर, हजारों बीघा फसल सिंचाई व पेयजल की बढ़ी समस्या,कुएं, बावड़ी का पानी पैंदे में जा पहुंचा।

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सात साल से पानी भराव को तरसा नारायण सागर बांध

बिजयनगर (अजमेर). अजमेर जिले का सबसे बड़ा नारायण सागर बांध इन दिनों पानी भराव को तरस रहा है। कभी छलछलाने वाले इस बांध का जलग्रहण क्षेत्र आज खाली पड़ा है। इसके चलते बांध से जुड़े गांवों का भूजल स्तर काफी गिर गया है। कुएं, बावड़ी का पानी पैंदे में जा पहुंचा।

हैण्डपम्प कुछ समय चलने के बाद पानी उगलना बंद कर रहे हैं। ऐसे में फसल सिंचाई व पेयजल की समस्या गंभीर हो गई है।

वैसे इस साल मानसून की निष्क्रियता के चलते भी जिले के कई बांध व तालाब रीते पड़े हैं। पेटे में लोगों ने फसल बुवाई कर दी। यहां मवेशियों के झुण्ड विचरण कर रहे हैं। इनके लिए भी पेयजल दिक्कतें बढ़ गई है।

अजमेर जिले के दक्षिणी छोर पर जालिया द्वितीय ग्राम स्थित इस बांध से हजारों बीघा कृषि जमीन पर फसल सिंचाई की जाती रही है। बांध के खाली रहने से खरीफ फसल की बुवाई व पैदावार काफी प्रभावित होगी। नारायण सागर बांध की पानी भराव क्षमता १6 फीट है।

नहरों के माध्यम से पानी

बारिश के समय भीम व टांटगढ़ के पहाड़ी क्षेत्र व खारी नदी का पानी इस बांध में आता है। इस बांध से फसल सिंचाई के लिए ग्राम जालिया द्वितीय, सूतीखेड़ा, बाड़ी, आसन, खूटिया, केसरपुरा, लोडियाना, सथाना बरल द्वितीय सहित कई गांवों में नहरों के माध्यम से पानी छोड़ा जाता है।

इस बार हजारों बीघा कृषि जमीन प्यासी रहेगी। इस बांध में अभी एक बूंद पानी नहीं है। बांध की खाली जमीन पर दलदल, कचरा व बबूल की भरमार है।

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के हाथों हुआ बांध का शिलान्यास

नारायण सागर बांध का शिलान्यास देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने वर्ष 1956 में किया था। आठ किलोमीटर लम्बे क्षेत्रफल में फैले इस बांध में जब भी अच्छी बरसात हुई। तब पानी छलछलाया था। जानकारों की मानें तो पिछले तीन दशक से यह बांध पूर्ण भराव क्षमता को तरस रहा है।
7 हजार एकड़ भूमि सिंचाई की क्षमता

जल संसाधन विभाग बांदनवाड़ा के अधीनस्थ नारायण सागर बांध में पानी की आवक के बाद सिंचाई के लिए दो मुख्य नहरें खारी कैनाल से जालिया बाड़ी क्षेत्र एवं खूटिया कैनाल से लोडियाना क्षेत्र में सात किलोमीटर लम्बी नहरों से सिंचाई के लिए पानी छोड़ा जाता है। इस बांध क्षेत्र के समीपस्थ ग्राम जालिया द्वितीय, सूतीखेड़ा, बाड़ी, आसन, खूटिया, केसरपुरा, लोडियाना, सथाना बरल द्वितीय इन्द्रगढ़, पाटया का खेड़ा सहित कई गावों में बांध की नहरों के माध्यम से फसल सिंचाई की जाती रही है। नहरों के अन्तिम टेल तक पानी पहुंचने की स्थिति में क्षेत्र के गांवों की लगभग सात हजार एकड़ भूमि सिंचिंत होती है।

वर्ष 2012 में आया था पानी

नारायण सागर बांध में निर्माण के बाद पर्याप्त बरसात के अभाव में पानी की आवक बहुत कम रही। बीते 18 वर्ष में मात्र दो बार पानी की आवक हुई। वर्ष 2001 में बांध में 11.8 फीट पानी का आवक हुई र्थी। उस पानी से क्षेत्र में लगभग साढ़े चार हजार एकड़ भूमि में सिंचाई हुई थी। उसके 11 वर्ष के लम्बे अन्तराल बाद 2012 में भी पानी की अच्छी आवक हुई थी। भराव क्षमता से अधिक आवक होने पर खारी नदी में पानी छोड़ा गया था, जिसके फलस्वरूप 17 अगस्त 2012 को बिजयनगर-गुलाबपुरा के बीच नदी की सड़क पर पानी बहा। बीते वर्ष 2018 में भी बरसात की कमी के चलते बांध क्षेत्र में मात्र 474 मिलीमीटर बरसात हुई जो औसतन से कम रही। बांध की आवक क्षेत्र खारी नदी में कुछ स्थानों पर एनीकट निर्माण हो जाने से भी बांध में पानी की आवक प्रभावित हुई है।