
smart classroom in mdsu
रक्तिम तिवारी/अजमेर.
महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय में स्मार्ट कक्षाएंअब तक सपना बनी हुई है। हाईटेक दौर में भी विश्वविद्यालय तकनीकी नवाचार से कोसों दूर हैं। स्मार्ट क्लास के लिए दस साल पहले खरीदे गए उपकरणों का अता-पता नहीं है। यहां हाईटेक सुविधाएं विकसित करने की सिर्फ बातें होती हैं। परिणाम कुछ नहीं निकलताहै।
सूचना प्रौद्योगिकी के अधिकाधिक इस्तेमाल और कक्षाओं में हाईटेक संसाधनों से अध्ययन-अध्यापन के लिए विश्वविद्यालय ने 2009-10 में करीब 50 लाख रुपए के तकनीकी उपकरण खरीदे थे। इनमें स्मार्ट बोर्ड, प्रोजेक्टर, माइक युक्त स्टैंड और अन्य सामान शामिल थे। इनका इस्तेमाल विभिन्न शैक्षिक विभागों में स्मार्ट क्लासरूम में किया जाना था। दुर्भाग्य से यहां दस साल में भी कक्षाएं स्मार्ट नहीं बन पाई हैं।
सामान का नहीं अता-पता
विश्वविद्यालय द्वारा खरीदे गए स्मार्ट उपकरणों का अता-पता नहीं है। यहां कला, वाणिज्य, सामाजिक विज्ञान, प्रबंधन औ अन्य किसी संकाय में प्रशासन द्वारा खरीदे गए स्मार्ट उपकरणों से पढ़ाई नहीं कराई जा रही। ई-लेक्चर अथवा ई-क्लासरूम तैयार नहीं हो पाए हैं। यहां के शिक्षक अथवा गेस्ट फेकल्टी पारंपरिक ब्लैक अथवा ग्रीन बोर्ड पर ही कक्षाएं ले रहे हैं।
स्कूल-कॉलेज में ज्यादा सुविधाएं..
विश्वविद्यालय के बजाय कई निजी और सरकारी स्कूल-कॉलेज आगे हैं। अधिकांश में स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी, परिसर में सीसीटीवी कैमरा, स्मार्ट प्रयोगशाला, कम्प्यूटर, प्रोजेक्टर वाले सेमिनार कक्ष और अन्य सुविधाएं हैं। कई संस्थानों में ई-लेक्चर से पढ़ाई हो रही है। विश्वविद्यालय ने किसी विभाग में ई-लेक्चर तैयार नहीं कराए हैं। यहां पिछले 14 साल पहले बहुउद्देशीय केंद्र बनाया गया था। इसमें सुदूर संवेदन तकनीक (रिमोट सेंसिंग) के जरिए विद्यार्थियों के लिए विशेषज्ञों के ई-लेक्चर कराए जाने थे। इस केंद्र का भी अता-पता नहीं है।
कुलपति करते रहे सिर्फ बातें...
पिछले दस साल में विश्वविद्यालय में कई कुलपतियों ने कार्यभार संभाला। किसी कुलपति ने भविष्य के मद्देनजर स्मार्ट क्लासरूम तैयार करने पर जोर नहीं दिया। यहां के अधिकारियों-शिक्षकों ने भी स्मार्ट क्लास के लिए खरीदे गए उपकरणों की सुध नहीं ली। ऐसा तब है जबकि मौजूदा दौर में विद्यार्थियों के लिए हाईटेक सुविधाएं जरूरी बन चुकी हैं।
कई जगह बदहाली
विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों के लिए आधारभूत सुविधाएं नहीं है। खेलकूद सुविधाओं पर ध्यान नहीं दिया जाता। यहां आउटडोर और इंडोर खेल सुविधाएं बदहाल हैं। कंपनियों को बुलाकर प्लेसमेंट कैंप/रोजगार मेलों का आयोजन नहीं होता है। विश्वविद्यालय परिसर में अन्तर विभागीय शैक्षिक और खेलकूद प्रतियोगिताएं नहीं कराई जाती। अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के उत्कृष्ट शोध नहीं होते हैं।
Published on:
11 Feb 2019, 6:33 AM IST
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