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रक्तिम तिवारी/अजमेर।
महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय को अगले साल लाखों नई अंकतालिकाएं छपवानी होंगी। मौजूदा परीक्षा नियंत्रक मार्च में सेवानिवृत्त होंगे। नियमानुसार प्रशासन को उनकेहस्ताक्षर और सील वाली मार्कशीट को नष्ट करना होगा। साथ ही कार्यभार सौंपने को लेकर भी मशक्कत करनी होगी। विश्वविद्यालय में फिलहाल डॉ. जगराम मीणा परीक्षा नियंत्रक हैं।
मीणा के कार्यकाल में विश्वविद्यालय की सालाना परीक्षाएं प्रारंभ हो जाएंगी, लेकिन वे परिणाम जारी होने से पहले 31 मार्च 2018 को सेवानिवृत्त होंगे। ऐसे में विश्वविद्यालय को स्नातक और स्नातकोत्तर परीक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए लाखों नई मार्कशीट छपवानी पड़ेंगी। साथ ही नियमों के मुताबिक डॉ. मीणा के हस्ताक्षर-सील वाली पुरानी मार्कशीट नष्ट करनी जरूरी होंगी।
बढ़ सकता है कार्यकाल!
यूं तो डॉ. मीणा मार्च में सेवानिवृत्त होंगे, लेकिन अंदरूनी स्तर पर उनका कार्यकाल बढ़ाए जाने की भी चर्चा है। हालांकि विश्वविद्यालय के सेवा नियमों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। विश्वविद्यालय के 31 साल के इतिहास में भी किसी अधिकारी को सेवा विस्तार नहीं दिया गया है।
नियमानुसार संबंधित अधिकारी, शिक्षक या कार्मिक को सेवानिवृत्त होने के बाद संविदा या अस्थायी रूप से दोबारा रखा जा सकता है। इससे पहले डॉ. जी. एन. व्यास की सेवानिवृत्ति के वक्त भी ऐसा हुआ था। प्रशासन ने उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद ही तत्काल सेवाओं में रखा था।
नया परीक्षा नियंत्रक ढूंढना सिरदर्द
विश्वविद्यालय के नया परीक्षा नियंत्रक ढूंढना सिरदर्द है। डॉ. मीणा इसी साल मई में स्थायी परीक्षा नियंत्रक बने हैं। उनके बाद किसी अधिकारी या शिक्षक को कार्यभार सौंपा जा सकता है। लेकिन यह विश्वविद्यालय के लिए यह आसान नहीं है। कुलपति और प्रबंध मंडल ही इसके लिए फैसला ले सकते हैं। मालूम हो कि मौजूदा वक्त विश्वविद्यालय में छह सहायक कुलसचिव (एक प्रतिनियुक्ति पर) और दो उप कुलसचिव हैं। इनमें भी वरिष्ठता को लेकर काफी खींचतान है। अधिकारियों में से किसी को भी पदभार सौंपने पर मामला अदालत में पहुंच सकता है।
फिर से होगी नई भर्ती
प्रबंध बोर्ड और कुलपति की सहमति हुई तो परीक्षा नियंत्रक के लिए नई भर्ती कराई जा सकती है। विश्वविद्यालय नए सिरे से आवेदन मांगकर परीक्षा नियंत्रक का चयन कर सकता है। ऐसा होने पर अधिकारियों को भी दिक्कत नहीं होगी।
Published on:
17 Dec 2017 12:56 pm
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