
नेक्स्ट परीक्षा से होगा मेडिकल पीजी में प्रवेश
धौलपुर. दिनोंदिन बढ़ रहे मरीजों से हांफ रहा जिला चिकित्सालय और परेशानी भुगत रहे लोग मेडिकल कॉलेज अस्पताल की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं। मेडिकल कॉलेज का अस्पताल भवन तो बन कर तैयार है, लेकिन पानी की मार इसे शुरू नहीं होने दे पा रही है। फिलहाल भवन में पानी का कोई इंतजाम नहीं है। मेडिकल कॉलेज को चंबल से पानी पहुंचाया जाना है। इसकी कवायद भी शुरू हो गई है। चिकित्सा विभाग की ओर से पीएचईडी को इस मद में दो करोड़ 68 लाख रुपए का भुगतान भी कर दिया गया है। उम्मीद जताई जा रही है कि सब कुछ ठीक रहा तो आने वाले तीन माह में यहां तक पानी पहुंचाने का काम पूरा हो जाएगा और अस्पताल को शुरू किया जा सकेगा।
चंबल से आएगा पानी
मेडिकल कॉलेज के लिए चंबल से पानी लाया जा रहा है। बताया जा रहा है कि चंबल से भोगीराम कॉलोनी तक पाइप लाइन डली हुई है। उससे आगे मेडिकल कॉलेज के लिए पाइप लाइप बिछाई जाएगी। मेडिकल कॉलेज में पानी की सुविधा होते ही यहां के अस्पताल को शुरू कर दिया जाएगा।
12 मई को हुए टेंडर
मेडिकल कॉलेज परिसर में चंबल का पानी पहुंचाने के लिए पीएचईडी ने 12 मई को ही टेंडर किए हैं। जल्द ही इस पर काम शुरू हो जाएगा। ऐसे में उम्मीद है कि आने वाले दो-तीन महीनों में कॉलेज व अस्पताल तक पानी पहुंच जाएगा।
मिलेंगी अत्याधुनिक सुविधाएं
चार मंजिला अस्पताल में रोगियों को सभी अत्याधुनिक सुविधाएं मिलेंगी। इनमें ऑपरेशन थिएटर, लैब आदि शामिल हैं। इसके साथ ही मेडिकल कॉलेज के रेजिडेंट व अन्य स्टाफ मिलने से रोगियों को सहूलियत होगी।
फिलहाल 500 बेड, एक हजार तक विस्तार
मेडिकल कॉलेज अस्पताल फिलहाल 500 बेड का बनाया गया है। हालांकि, इसमें सुविधा है कि जरूरत पडऩे पर इसे 1000 बेड के अस्पताल में विस्तारित किया जा सकता है। पर्याप्त स्टाफ मिलने के कारण रोगियों को यहां बेहतर इलाज मिल सकेगा।
जिला अस्पताल में तीन गुना मरीज
गर्मी के कारण मौसमी बीमारियों का प्रकोप जिलेभर में बढ़ता ही जा रहा है। हालात यह हैं कि जिला अस्पताल में क्षमता से तीन गुना तक मरीज भर्ती हैं। ऐसे में एक बेड पर दो-तीन रोगियों का इलाज किया जा रहा है। यहां 300 बेड के हिसाब से स्टाफ है। ऐसे में इस स्टाफ को ही तीन गुना मरीजों की देखभाल में जुटना पड़ रहा है। पर्याप्त स्टाफ के बिना रोगियों को परेशानी हो रही है।
इनका कहना है
मेडिकल कॉलेज अस्पताल सितंबर तक शुरू होने की उम्मीद है। निश्चित ही इससे लोगों को सहूलियत होगी। जिला अस्पताल का भार भी कम होगा।
- डॉ. सरमवीर सिंह सिकरवार, पीएमओ, धौलपुर
Published on:
17 May 2022 01:05 am
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