
अजमेर. अगर आप कोलेस्ट्रॉल की समस्या से जूझ रहे हैं, एलर्जी से परेशान हैं तो इन नुस्खे एवं औषधियों का उपयोग कर सकते हैं। ताकि आपको राहत मिल सके। हर आयु वर्ग के लोगों में कोलेस्ट्रॉल बढऩे से हार्टअटैक सहित अन्य बीमारियां बढ़ रही हैं। ऐसे में जड़ी बूटियों व अन्य से निर्मित औषधियां कारगर साबित हो सकती हैं।
अजमेर के वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता पं. रामस्वरूप के अनुसार इन औषधियों का कोई साइड इफेक्ट भी नहीं है। स्वास्थ्यवद्र्धक तत्वों का समावेश कर इन्हें तैयार किया गया है। यह चूर्ण के रूप में उपलब्ध है। सर्दी प्रारंभ हो गई है, जुकाम, खांसी एवं कफ से कई लोग परेशान होने लगे हैं। ऐसे में इन औषधियों का उपयोग करें या फिर घर पर ही औषधि तैयार कर सेवन कर सकते हैं।
असात्मनिरोधी (एलर्जी): एलर्जी की बीमारी को कम करने एवं खत्म करने के लिए असात्मनिरोधी चूर्ण तैयार किया गया है। इसमें आंवला, सौंफ को पीसकर एवं छानकर इसमें देशी खांड (देशी चीनी) का बूरा निर्धारित मात्रा में मिश्रण किया जाता है। करीब 5 ग्राम चूर्ण (पाउडर) दिनभर में 7 से 8 बार पानी पीने से पहले खा लें। करीब 50 दिन में करीब एक किग्रा चूर्ण का सेवन एलर्जी को खत्म करने के साथ खून को साफ बना देगा।
कोलेस्ट्रॉल :आज अधिकतर लोग कोलेस्टॉल की समस्या से जूझ रहे हैं। पं. रामस्वरूप के अनुसार कोलेस्ट्रॉल घटाने के लिए छोटी पीपल, दालचीनी का चूर्ण बनाकर ढाई ग्राम गुनगुने पानी में सेवन करें। भोजन से पहले इसे सात सप्ताह तक गुनगुने पानी में डालकर पीएं। सात दिन बाद कोलेट्रॉल जांच कराएं। इसके अनुसार मात्रा बढ़ा-घटा सकते हैं।
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त्रिमूल: महिलाओं, पुरुषों में बादी, कफ की बीमारी के निवारण के लिए तीन वनौषधियां,जड़ी बूंटियां मिलाकर त्रिमूल का चूर्ण बनाया गया है। इसमें अश्वगंधा, शतावरी एवं मूलेठी मिलाकर चूर्ण बनाएं। अश्वगंधा से बादी, बदन में दर्द, पेट में आपरा कम होता है, शतावरी से बदन में गर्मी, खून में गर्मी को छांटने में शतावरी काम करती है। वहीं श्लेष्मनिरोधी मूलेठी कफ व दमा को कम करती हैं। इन तीनों के चूर्ण को भोजन से पूर्व गुनगुने पानी में लेने से राहत मिलती है। इससे सबल बनने में भी मदद मिलती है।