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आखिर, गायों की मौत का खुल गया रहस्य! जो चारा मख्य खुराक,उसी ने ले ली जान…

hindi news राई के बाद आफरा आने से पांच गोवंश की हुई अकाल मौत, मुंह से झाग व नथुनों से खून निकलने के बाद तडफ़-तडफ़ कर निकली जान, ग्रामीणों ने विषाक्त सेवन से मौत पर जताई थी आशंका, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुआ असली खुलासा

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आखिर, गायों की मौत का खुल गया रहस्य! जो चारा मख्य खुराक,उसी ने ले ली जान...

आखिर, गायों की मौत का खुल गया रहस्य! जो चारा मख्य खुराक,उसी ने ले ली जान...

अजमेर. जिले के ग्राम पंचायत जूनियां स्थित बीड़ के बालाजी क्षेत्र में पांच गायों की मौत अधिक हरा चारा चरने से हुई। यह खुलासा मृत गायों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से हुई है। दरअसल, जो खुराक जीवन के लिए जरूरी है। यदि वही जहर बन जाए तो इसे बदकिस्मत ही कहा जा सकता है। इन दिनों खेतों में रबी फसल लहलहा रही है। इस साल बारिश अच्छी होने से जंगल में भी हरियाली है। इसलिए पशुपालकों के सामने चारे की समस्या नहीं है।

दूसरी ओर जूनियां इलाके में गोवंश की मौतें इसलिए हो गई कि उन्होंने हरा चारा चाव से चरा। यह सामान्य बात है कि जंगल में घास चरते-चरते मवेशी किसी खेत में भी घुस जाते हैं। जूनियां इलाके में करीब आठ गोवंश की मौत के पीछे भी यह वजह बताई गई है। खेत में गेंहू, जौ,चना व सरसों की फसल लहलहा रही है। इनमें कीटनाशक दवा का छिडक़ाव किया जाता रहा है। रासायनिक खाद भी डाली जाती है। जूनियां क्षेत्र में जिस गोवंश की मौत हुई है। उन्होंने खेतों में यह चारा चरा जो विषाक्त था। मृतक गोवंश की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी इसी का हवाला बताते हैं।

...तब जाकर लगाए टीके

पिछले दिनों नागोला इलाके में अज्ञात बीमारी से मवेशियों की मौत हो गई थी। कई दिनों तक पशु चिकित्सा विभाग ने कोई ध्यान नहीं दिया। बाद में ‘पत्रिका ’ में समाचार प्रकाशित हुआ। तब जाकर पशु चिकित्सा विभाग की टीम ने बीमार मवेशियों के टीके लगाए। यदि यही कार्रवाई समय पर की जाती तो पशुधन बचाया जा सकता था।

महंगाई के जमाने में दोहरी मार

किसान कभी अतिवष्टि तो कभी सूखे की मार झेलता है। मवेशियों को पालना भी किसी चुनौती से कम नहीं है। चारे-पानी की समस्या से जूझना आम है। इस बीच यदि मवेशियों की अकाल मौत हो जाए तो किसानों के साथ दोहरी मार कही जा सकती है। खुरपका तो कभी मुंहपका की बीमारी भी मवेशियों के लिए जानलेवा साबित होती रही है। यदि पशु चिकित्सा विभाग समय-समय पर चिकित्सा शिविर लगाता रहे तो मवेशियों को अकाल मौत के मुंह में जाने से बचाया जा सकता है।

जहर देने की आशंका हुई निर्मूल सिद्ध

जूनियां क्षेत्र के बीड़ के बालाजी के आसपास गोवंश की मौत को लेकर ग्रामीणों ने आशंका जताई थी कि मुंह से झाग आना और तडफ़-तडफ़ कर दम तोडऩा विषाक्त सेवन का संकेत है। इससे लगता है कि किसी ने उन्हें जहर दिया है। इस आशंका के पीछे तर्क यह था कि गोवंश झुंड खेत पर जाकर फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इससे नाराज खेत मालिक ने कहीं गोवंश को जहर तो नहीं दे दिया हैं।

कुछ लोगों को यह भी आशंका जताई थी कि रबी फसल पर कीटनाशक दवा का छिडक़ाव किया गया है। साथ में अधिक चराई से भी अपचन की स्थिति में गायों की मौत संभव है। केकड़ी के पशु चिकित्सक अमित पारीक ने मृत गायों का पोस्टमार्टम किया तो हकीकत सामने आ गई। दरअसल,गायों की मौत अधिक हरा चारा चरने से हुई। इसमें कीटनाशक दवा व रासायनिक खाद का मिश्रण था जिसने विषाक्त का कार्य किया।